सम्पूर्णानन्द संस्कृत विश्वविद्यालय का 44वां दीक्षान्त समारोह 29 जुलाई को, 11,958 विद्यार्थियों को मिलेंगी उपाधियां | AARCC LIVE NEWS VARANASI
सम्पूर्णानन्द संस्कृत विश्वविद्यालय का 44वां दीक्षान्त महोत्सव 29 जुलाई को, 11,958 विद्यार्थियों को मिलेंगी उपाधियां
51 स्वर्ण पदकों से सम्मानित होंगे 29 मेधावी छात्र-छात्राएं, राज्यपाल आनंदीबेन पटेल करेंगी उत्कृष्ट शिक्षकों का सम्मान
वाराणसी, 27 जुलाई 2026। सम्पूर्णानन्द संस्कृत विश्वविद्यालय, वाराणसी का 44वां दीक्षान्त महोत्सव 29 जुलाई 2026 को प्रातः 9 बजे विश्वविद्यालय के ऐतिहासिक मुख्य भवन में आयोजित किया जाएगा। समारोह की अध्यक्षता उत्तर प्रदेश की राज्यपाल एवं विश्वविद्यालय की कुलाधिपति श्रीमती आनंदीबेन पटेल करेंगी। समारोह में भारतीय ज्ञान परम्परा, संस्कृत संस्कृति और शैक्षिक उत्कृष्टता का भव्य संगम देखने को मिलेगा।
दीक्षान्त समारोह के मुख्य अतिथि प्रख्यात वैज्ञानिक, शिक्षाविद् एवं पद्मश्री सम्मान से अलंकृत प्रो. आशुतोष शर्मा होंगे। वहीं उत्तर प्रदेश सरकार के उच्च शिक्षा मंत्री श्री योगेन्द्र उपाध्याय और उच्च शिक्षा राज्य मंत्री श्रीमती रजनी तिवारी विशिष्ट अतिथि के रूप में उपस्थित रहेंगी। विश्वविद्यालय के कुलपति प्रो. बिहारी लाल शर्मा वार्षिक प्रगति एवं उपलब्धियों का प्रतिवेदन प्रस्तुत करेंगे, जबकि कुलसचिव श्री राकेश कुमार समारोह की औपचारिक कार्यवाही सम्पन्न कराएंगे।
11,958 विद्यार्थियों को प्रदान की जाएंगी उपाधियां एवं प्रमाण-पत्र
44वें दीक्षान्त महोत्सव में वर्ष 2026 की परीक्षाओं में सफल कुल 11,958 विद्यार्थियों को विभिन्न उपाधियां एवं प्रमाण-पत्र प्रदान किए जाएंगे। इनमें प्रथम, पूर्व मध्यमा, उत्तर मध्यमा, शास्त्री, आचार्य, शिक्षाशास्त्री, संस्कृत प्रमाणपत्रीय, आयुर्वेदाचार्य तथा विद्यावारिधि सहित विभिन्न पाठ्यक्रमों की उपाधियां शामिल हैं।
समारोह के दौरान विभिन्न परीक्षाओं में सर्वोच्च अंक प्राप्त करने वाले 29 मेधावी छात्र-छात्राओं को 51 स्वर्ण पदकों से सम्मानित किया जाएगा। इनमें 17 छात्रों को 35 तथा 12 छात्राओं को 16 स्वर्ण पदक प्रदान किए जाएंगे। विद्यार्थियों को उनकी उपाधियां एवं प्रमाण-पत्र डीजी लॉकर के माध्यम से भी उपलब्ध कराए जाएंगे।
चार विश्वविद्यालयों एवं महाविद्यालयों के उत्कृष्ट शिक्षक होंगे सम्मानित
दीक्षान्त महोत्सव में राज्यपाल एवं कुलाधिपति श्रीमती आनंदीबेन पटेल द्वारा चार विश्वविद्यालयों एवं महाविद्यालयों के एक-एक एवं तीन उत्कृष्ट अध्यापकों को उनके उल्लेखनीय शैक्षणिक, शोध एवं अकादमिक योगदान के लिए सम्मानित किया जाएगा। इस पहल का उद्देश्य उच्च शिक्षा में गुणवत्ता, नवाचार, अनुसंधान और उत्कृष्ट अध्यापन को प्रोत्साहित करना है।
235 वर्षों की गौरवशाली परम्परा का वाहक है विश्वविद्यालय
सम्पूर्णानन्द संस्कृत विश्वविद्यालय की शैक्षिक यात्रा वर्ष 1791 में स्थापित संस्कृत महाविद्यालय से प्रारम्भ हुई थी। वर्ष 1958 में यह वाराणसेय संस्कृत विश्वविद्यालय और वर्ष 1973 में सम्पूर्णानन्द संस्कृत विश्वविद्यालय के रूप में विकसित हुआ। लगभग 235 वर्षों की गौरवशाली शैक्षिक परम्परा को संजोए विश्वविद्यालय आज उत्तर प्रदेश के साथ-साथ देश के विभिन्न राज्यों के विद्यार्थियों को संस्कृत एवं भारतीय ज्ञान परम्परा से जुड़ी उच्च शिक्षा प्रदान कर रहा है।
पद्मश्री प्रो. आशुतोष शर्मा होंगे मुख्य अतिथि
समारोह के मुख्य अतिथि पद्मश्री प्रो. आशुतोष शर्मा देश के प्रतिष्ठित वैज्ञानिक एवं शिक्षाविदों में शामिल हैं। उन्होंने आईआईटी कानपुर से रासायनिक अभियांत्रिकी की शिक्षा प्राप्त की और अमेरिका के प्रतिष्ठित विश्वविद्यालयों में शोध कार्य किया। वे आईआईटी कानपुर में प्राध्यापक रहे तथा भारत सरकार के विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी विभाग (DST) के सचिव के रूप में विज्ञान, अनुसंधान एवं नवाचार के क्षेत्र में महत्वपूर्ण योगदान दिया। वर्तमान में वे आईआईटी कानपुर के इंस्टीट्यूट चेयर प्रोफेसर एवं भारतीय राष्ट्रीय विज्ञान अकादमी (INSA) के अध्यक्ष हैं। उन्हें शांति स्वरूप भटनागर पुरस्कार, इन्फोसिस पुरस्कार और यूरेका पुरस्कार सहित अनेक राष्ट्रीय एवं अंतरराष्ट्रीय सम्मान प्राप्त हो चुके हैं। वर्ष 2025 में उन्हें पद्मश्री से सम्मानित किया गया।
लोकगीत और लोकनृत्य से सजेगा दीक्षान्त समारोह
दीक्षान्त महोत्सव के दौरान विश्वविद्यालय की उपलब्धियों पर आधारित लघु वृत्तचित्र का प्रदर्शन किया जाएगा। इसके साथ ही भारतीय सांस्कृतिक विरासत की झलक प्रस्तुत करते हुए लोकगीत, लोकनृत्य एवं विभिन्न सांस्कृतिक कार्यक्रमों की आकर्षक प्रस्तुतियां भी होंगी।
'विकसित भारत-2047' पर केंद्रित है इस वर्ष की थीम
इस वर्ष के दीक्षान्त महोत्सव की थीम "संस्कृत एवं भारतीय ज्ञान परम्परा : विकसित भारत-2047 का वैचारिक अधिष्ठान" निर्धारित की गई है। थीम के माध्यम से भारतीय ज्ञान-विज्ञान, सांस्कृतिक मूल्यों और संस्कृत की समृद्ध परम्परा को आधुनिक भारत के विकास से जोड़ने का संदेश दिया गया है।
विश्वविद्यालय का मानना है कि संस्कृत केवल एक भाषा नहीं, बल्कि ज्ञान, संस्कृति और भारतीय चिंतन की समृद्ध परम्परा का आधार है। भारतीय ज्ञान परम्परा के इसी मूल भाव को विकसित भारत-2047 के संकल्प से जोड़ते हुए 44वां दीक्षान्त महोत्सव शिक्षा, संस्कृति, शोध, नवाचार और राष्ट्र निर्माण के संकल्प का प्रतीक बनेगा।
इस अवसर पर कुलसचिव राकेश कुमार, परीक्षा नियंत्रक दिनेश कुमार, प्रो. हीरक कान्ति चक्रवर्ती, डॉ. विशाखा शुक्ला, डॉ. रविशंकर पाण्डेय एवं जनसम्पर्क अधिकारी शशीन्द्र मिश्र सहित अन्य अधिकारी एवं शिक्षक उपस्थित रहे।










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