आयुर्वेदिक-यूनानी बोर्ड की निष्क्रियता के खिलाफ आंदोलन, 30 जुलाई से लखनऊ में प्रदेश स्तरीय धरना | AARCC LIVE NEWS VARANASI
आयुर्वेदिक-यूनानी पैरामेडिकल संस्थाओं व छात्रों की समस्याओं को लेकर 30 जुलाई से लखनऊ में प्रदेशव्यापी धरना
वाराणसी। आयुर्वेदिक तथा यूनानी तिब्बी चिकित्सा पद्धति बोर्ड उत्तर प्रदेश की कार्यप्रणाली और लंबे समय से बोर्ड के अक्रियाशील रहने को लेकर आयुर्वेदिक एवं यूनानी पैरामेडिकल संस्थाओं और छात्रों में आक्रोश है। इस संबंध में विभिन्न मांगों को लेकर 30 जुलाई 2026 से लखनऊ में प्रदेश स्तरीय धरना आयोजित करने की घोषणा की गई है।
इस संबंध में मुख्यमंत्री को जिलाधिकारी वाराणसी के माध्यम से भेजे गए मांगपत्र में आरोप लगाया गया है कि आयुष विभाग के अधिकारियों की कथित निष्क्रियता और विधि विरुद्ध कार्यों के कारण बोर्ड लंबे समय से सुचारु रूप से कार्य नहीं कर पा रहा है। इससे बोर्ड से संबद्ध आयुर्वेदिक एवं यूनानी पैरामेडिकल संस्थानों, छात्रों और अन्य संबंधित लोगों को कठिनाइयों का सामना करना पड़ रहा है।
मांगपत्र में कहा गया है कि उच्च न्यायालय के आदेश के बावजूद बोर्ड के कार्यों को सुचारु रूप से संचालित करने में अपेक्षित कार्रवाई नहीं की गई। प्रदर्शनकारियों ने सरकार से मामले में तत्काल हस्तक्षेप कर बोर्ड को प्रभावी ढंग से क्रियाशील करने की मांग की है।
मांगपत्र में प्रमुख सचिव आयुष रंजन कुमार को आयुष विभाग से तत्काल हटाने और उनके कथित विधि विरुद्ध कार्यों की जांच कर कार्रवाई करने की मांग की गई है। साथ ही बोर्ड के रजिस्ट्रार को भी तत्काल हटाने की मांग की गई है। आरोप है कि बोर्ड के निर्णयों का क्रियान्वयन कराने और लगातार दो सत्रों से परीक्षाएं कराने में रजिस्ट्रार विफल रहे हैं।
इसके अलावा मांग की गई है कि उत्तर प्रदेश इंडियन मेडिसिन एक्ट, 1939 के प्रावधानों और उच्च न्यायालय के आदेश के अनुरूप बोर्ड के कार्यकाल को विधि सम्मत तरीके से बढ़ाते हुए उपाध्यक्ष को कार्यभार सौंपकर बोर्ड को स्थिर किया जाए, ताकि परीक्षा, नवीनीकरण, प्रवेश सहित लंबित शैक्षणिक कार्यों को पूरा कराया जा सके।
मांगपत्र में बोर्ड के सुचारु संचालन की गारंटी देने और उसके कार्यों में किसी भी स्तर से बाधा नहीं डालने की मांग भी की गई है। साथ ही शासन स्तर पर होने वाली किसी भी वार्ता में बोर्ड के उपाध्यक्ष को शामिल करने की बात कही गई है, ताकि बोर्ड की कानूनी स्थिति स्पष्ट हो सके और भविष्य में किसी प्रकार के न्यायिक विवाद से बचा जा सके।
प्रदर्शनकारियों ने यह भी मांग की है कि परीक्षा आयोजित नहीं होने के कारण छात्रवृत्ति से वंचित हुए छात्रों को हुई कथित क्षति की भरपाई की जाए।
आयोजकों का कहना है कि यदि उनकी मांगों पर समय रहते सकारात्मक निर्णय नहीं लिया गया तो 30 जुलाई से लखनऊ में प्रदेश स्तरीय धरना जारी रहेगा। उन्होंने मुख्यमंत्री से मामले में हस्तक्षेप कर आयुर्वेदिक एवं यूनानी पैरामेडिकल संस्थाओं तथा छात्रों के हित में शीघ्र कार्रवाई की मांग की है।










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