कण-कण में विद्यमान परमात्मा को पहचान कराने वाला ही सद्गुरु होता है और सच्चे संत का मिलना ही ईश्वर प्राप्ति का संकेत है : महात्मा सुजाता बाई जी || AARCC LIVE NEWS VARANASI
वाराणसी/रिपोर्ट:- आलोक चतुर्वेदी अखिल भारतीय आध्यात्मिक एवं सामाजिक संस्था मानव उत्थान सेवा समिति के तत्वावधान में दो दिवसीय सद्भावना सत्संग समारोह का भव्य शुभारंभ बाबा विश्वनाथ की नगरी वाराणसी के धूपचंडी स्थित स्वयंवर लॉन में हुआ। यह आयोजन समिति के संस्थापक एवं आध्यात्मिक गुरु पूज्य श्री सतपाल जी महाराज की प्रेरणा से संपन्न हो रहा है। समारोह के प्रथम दिन बिहार प्रांत प्रभारी महात्मा हीरा बाई जी ने उपस्थित भक्तों को संबोधित करते हुए कहा कि परमात्मा कण-कण में विद्यमान हैं, परंतु बिना योग-साधना और सद्गुरु के मार्गदर्शन के उनका साक्षात्कार संभव नहीं है। उन्होंने उदाहरण देते हुए कहा कि जैसे दूध में घी, सरसों में तेल और पानी में बिजली छिपी होती है, उसी प्रकार परमात्मा सर्वत्र मौजूद हैं, पर उन्हें जानने के लिए सही विधि आवश्यक है। कण-कण में बसे परमात्मा की अनुभूति कराने वाला ही सच्चा सद्गुरु होता है। वाराणसी प्रभारी महात्मा सुजाता बाई जी ने अपने प्रवचन में कहा कि जब जीवन में सच्चे संत का सानिध्य प्राप्त होता है, तब यह समझ लेना चाहिए कि ईश्वर प्राप्ति का समय निकट आ गया है। उन्होंने कहा कि...