काशी विद्यापीठ में राष्ट्रीय शिक्षा नीति-2020 के प्रभावी क्रियान्वयन पर शिक्षाविदों का मंथन | Aarcc Live News Varanasi
राष्ट्रीय शिक्षा नीति-2020 से विकसित भारत का सपना होगा साकार: प्रो. रजनीश शुक्ला
वाराणसी, 6 जुलाई। महात्मा गांधी काशी विद्यापीठ, वाराणसी के मालवीय मिशन शिक्षक प्रशिक्षण केन्द्र द्वारा आयोजित पुनर्श्चर्या कार्यक्रम "राष्ट्रीय शिक्षा नीति-2020 और शैक्षिक सुधार" का शुभारंभ सोमवार को हुआ। उद्घाटन सत्र में शिक्षाविदों ने राष्ट्रीय शिक्षा नीति-2020 के प्रभावी क्रियान्वयन, भारतीय ज्ञान परंपरा और तकनीक आधारित शिक्षा की आवश्यकता पर विस्तार से चर्चा की।
मुख्य अतिथि प्रो. रजनीश शुक्ला, पूर्व कुलपति, महात्मा गांधी अंतरराष्ट्रीय हिंदी विश्वविद्यालय, वर्धा ने कहा कि राष्ट्रीय शिक्षा नीति-2020 का उद्देश्य शिक्षा को समाज के अंतिम व्यक्ति तक पहुंचाकर विद्यार्थियों का समग्र विकास सुनिश्चित करना है। उन्होंने कहा कि कृत्रिम बुद्धिमत्ता (AI) आज शिक्षा का महत्वपूर्ण हिस्सा बन चुकी है, इसलिए विद्यार्थियों में समालोचनात्मक एवं सृजनात्मक चिंतन का विकास आवश्यक है। उन्होंने आजीवन अधिगम, स्थानीय संदर्भों से जुड़ाव और वैश्विक दृष्टिकोण अपनाने पर बल देते हुए कहा कि भौतिक एवं सांस्कृतिक आत्मनिर्भरता के माध्यम से विकसित भारत-2047 के लक्ष्य को प्राप्त किया जा सकता है।
कार्यक्रम की अध्यक्षता करते हुए महात्मा गांधी काशी विद्यापीठ के कुलपति प्रो. आनन्द कुमार त्यागी ने राष्ट्रीय शिक्षा नीति-2020 के अंतर्गत शिक्षा व्यवस्था में हो रहे महत्वपूर्ण बदलावों पर प्रकाश डाला। उन्होंने आधारभूत साक्षरता एवं संख्यात्मक ज्ञान, बहु-प्रवेश एवं बहु-निर्गम व्यवस्था, अकादमिक क्रेडिट प्रणाली तथा भारतीय ज्ञान परंपरा आधारित पाठ्यक्रमों के महत्व को रेखांकित किया। उन्होंने कहा कि नई शिक्षा नीति का उद्देश्य विद्यार्थियों को गुणवत्तापूर्ण, व्यावहारिक और रोजगारोन्मुख शिक्षा उपलब्ध कराना है।
प्रथम तकनीकी सत्र में केंद्रीय विश्वविद्यालय, राजस्थान के मुक्त एवं दूरस्थ शिक्षा एवं अनुसंधान केंद्र के निदेशक प्रो. भुवन चन्द्र महापात्रा ने राष्ट्रीय शिक्षा नीति-2020 के प्रभावी क्रियान्वयन, क्रेडिट आधारित चयन प्रणाली तथा ऑनलाइन मूल्यांकन प्रणाली की विस्तृत जानकारी दी। उन्होंने बताया कि यह व्यवस्था विद्यार्थियों को विषय चयन में लचीलापन, गुणवत्तापूर्ण शिक्षा और समान अवसर प्रदान करती है। उन्होंने TPACK मॉडल, कौशल संवर्धन तथा शिक्षा में प्रौद्योगिकी के प्रभावी उपयोग पर भी अपने विचार रखे।
दूसरे तकनीकी सत्र में श्री सत्य साईं इंस्टीट्यूट ऑफ ह्यूमन एक्सीलेंस, कलबुर्गी (कर्नाटक) की निदेशक प्रो. मीनाक्षी बिस्वाल ने भारतीय ज्ञान परंपरा के महत्व और उसके समकालीन शिक्षा में उपयोग पर व्याख्यान दिया।
कार्यक्रम में अतिथियों का स्वागत मालवीय मिशन शिक्षक प्रशिक्षण केन्द्र के निदेशक प्रो. रमाकान्त सिंह ने किया, जबकि संचालन सह-समन्वयक डॉ. ध्यानेंद्र कुमार मिश्रा ने किया। कार्यक्रम के सफल संचालन में डॉ. विनय सिंह, अनुपम मिश्रा, दीपशिखा श्रीवास्तव, त्रियंबिका सिंह, सारिका एवं सरस्वती का महत्वपूर्ण सहयोग रहा।










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