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आईजीएनसीए में “21वीं सदी में सांस्कृतिक विमर्श एवं नवाचार” विषय पर व्याख्यान सम्पन्न | AARCC LIVE NEWS VARANASI

“भारत की संस्कृति शाश्वत और अनादि अनंत है” — अमिताभ अग्निहोत्री 

रिपोर्ट/आलोक चतुर्वेदी/सचिन देव

इन्दिरा गाँधी राष्ट्रीय कला केन्द्र के क्षेत्रीय केन्द्र, वाराणसी द्वारा 16 मई 2026 को शब्दन फाउंडेशन के सहयोग से “21वीं सदी में सांस्कृतिक विमर्श एवं नवाचार” विषयक एकदिवसीय व्याख्यान का आयोजन किया गया। कार्यक्रम में प्रख्यात मीडिया विद्वान एवं वरिष्ठ पत्रकार अमिताभ अग्निहोत्री मुख्य वक्ता के रूप में उपस्थित रहे।

इस अवसर पर काशी हिन्दू विश्वविद्यालय के अन्तर विश्वविद्यालय अध्यापक शिक्षा केन्द्र के निदेशक प्रो० प्रेम नारायण सिंह मुख्य अतिथि के रूप में शामिल हुए, जबकि कृषि विज्ञान संस्थान, बीएचयू के वरिष्ठ आचार्य प्रो० गुरु प्रसाद सिंह ने कार्यक्रम की अध्यक्षता की।

कार्यक्रम का शुभारम्भ देवी सरस्वती के चित्र पर पुष्पांजलि एवं दीप प्रज्ज्वलन के साथ हुआ। मंगलाचरण संस्कृत विद्वान वृहस्पति पाण्डेय द्वारा प्रस्तुत किया गया। क्षेत्रीय केन्द्र के निदेशक डॉ० अभिजित् दीक्षित ने स्वागत उद्बोधन में कहा कि “काशी संस्कृति का जीवन्त प्रतिनिधि है और हम इसे संस्कार के रूप में स्वीकार करते हैं।”

कार्यक्रम के दौरान शब्दन फाउंडेशन की ओर से वरिष्ठ कला-प्रशासक गौतम चटर्जी को उनके दीर्घ सेवाकाल के लिए सम्मानित किया गया।

अपने मुख्य व्याख्यान में अमिताभ अग्निहोत्री ने कहा कि भारत की संस्कृति शाश्वत एवं अनादि-अनंत है। उन्होंने काशी को भारतीय सांस्कृतिक चेतना और ऊर्जा का केंद्र बताते हुए कहा कि यहाँ राजनीति, अर्थव्यवस्था और धर्म के मध्य संतुलित समन्वय ने भारतीय संस्कृति को नए आयाम प्रदान किए हैं। उन्होंने सांस्कृतिक नवाचारों को भारतीय समाज की जीवंतता, लोकमंगल और आध्यात्मिक दृष्टि का आधार बताया।

मुख्य अतिथि प्रो० प्रेम नारायण सिंह ने कहा कि “संस्कृति को सहेजना अगली पीढ़ी के लिए समाज को सुरक्षित रखने का मूल लक्ष्य है।” वहीं अध्यक्षीय उद्बोधन में प्रो० गुरु प्रसाद सिंह ने कहा कि “संस्कृति का सनातन तत्व स्वयं में प्रगतिशील है और इसके नवाचार ही इसके उन्मेष के प्रतीक हैं।”

कार्यक्रम का संचालन डॉ० शिवेन्द्र सिंह ने किया, जबकि धन्यवाद ज्ञापन गौतम चटर्जी द्वारा प्रस्तुत किया गया।



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