सीधे मुख्य सामग्री पर जाएं

चाँदमारी में ‘हरे कृष्ण ज्वेलर्स’ के नौवें शोरूम का भव्य उद्घाटन | AARCC LIVE NEWS VARANASI

रिपोर्ट/आलोक चतुर्वेदी

वाराणसी, 21 अप्रैल। शहर के चाँदमारी क्षेत्र में ‘हरे कृष्ण ज्वेलर्स’ के नौवें शोरूम का भव्य उद्घाटन मंगलवार को प्रातः 11:30 बजे किया गया। उद्घाटन मुख्य अतिथि श्री शियाराम जी, जो संस्थान के सबसे पुराने सदस्य एवं वरिष्ठ कार्याधिकारी हैं, के कर-कमलों द्वारा सम्पन्न हुआ।




इस अवसर पर संस्थान के अधिष्ठाता संतोष अग्रवाल ने बताया कि ग्राहकों को बेहतर एवं सुविधाजनक सेवाएं उपलब्ध कराने के उद्देश्य से चाँदमारी (स्टेट बैंक के सामने) में इस नई शाखा की शुरुआत की गई है। उद्घाटन के उपलक्ष्य में ग्राहकों के लिए विशेष ऑफर भी घोषित किए गए हैं, जिसमें 10 ग्राम सोने के आभूषणों पर ₹2400 की सीधी छूट, डायमंड ज्वेलरी पर 20 प्रतिशत तक की छूट तथा पुराने सोने के आभूषणों पर 100 प्रतिशत एक्सचेंज सुविधा शामिल है।

संस्थान के चेतन अग्रवाल ने बताया कि त्योहारों और वैवाहिक सीजन को ध्यान में रखते हुए शोरूम में आधुनिक व आकर्षक ज्वेलरी का विस्तृत कलेक्शन उपलब्ध कराया गया है। इसमें हीरे की अंगूठियां, कपल एंगेजमेंट बैंड, नोजपिन, लाइटवेट नेकलेस सेट और डायमंड चूड़ी सेट प्रमुख हैं। सभी डायमंड ज्वेलरी के साथ IGI प्रमाणपत्र भी दिया जा रहा है, जिससे ग्राहकों को गुणवत्ता की पूर्ण गारंटी मिलती है।






कार्यक्रम के अंत में रौनक जी ने उपस्थित अतिथियों, ग्राहकों, गणमान्य नागरिकों एवं मीडिया प्रतिनिधियों के प्रति आभार व्यक्त किया। इस अवसर पर चेतन अग्रवाल, रुपिका अग्रवाल, कोमल अग्रवाल सहित परिवार के अन्य सदस्य एवं कई गणमान्य लोग मौजूद रहे।








टिप्पणियाँ

इस ब्लॉग से लोकप्रिय पोस्ट

मातृ दिवस समारोह में माताओं का हुआ सम्मान, बच्चों ने आरती उतारकर व्यक्त किया प्रेम और सम्मान | Aarcc Live News Varanasi

आर्क लाइव:-आलोक चतुर्वेदी/सचिनदेव   वाराणसी। श्री हरि धर्म विज्ञान सेवा संस्थान में संस्थापिका स्वर्गीय आशा देवी पाठक की स्मृति में मातृ दिवस समारोह का आयोजन बड़े ही उत्साह एवं श्रद्धा के साथ किया गया। कार्यक्रम का शुभारंभ प्रबंधक पंडित शिवानंद पाठक एवं प्रधानाचार्य विनोद कुमार वर्मा द्वारा दीप प्रज्वलन तथा मां सरस्वती की प्रतिमा पर माल्यार्पण कर किया गया। इस अवसर पर सह निदेशक आशुतोष पाठक एवं सौरभ पाठक ने अपनी माताजी की प्रतिमा पर पुष्पांजलि अर्पित की। इसके पश्चात विद्यालय के बच्चों ने अपनी माताओं की आरती कर उनका सम्मान किया। कार्यक्रम में विद्यालय के शिक्षक-शिक्षिकाओं ने मातृ दिवस के महत्व पर प्रकाश डालते हुए कहा कि मां ममता, त्याग और निःस्वार्थ सेवा की प्रतिमूर्ति होती है तथा जीवन में संस्कारों का पहला पाठ मां ही सिखाती है। प्रधानाचार्य विनोद कुमार वर्मा ने बच्चों को संबोधित करते हुए कहा कि मां प्रेम, शांति और त्याग की साक्षात मूरत होती है। सह निदेशक आशुतोष पाठक एवं सौरभ पाठक ने सभी माताओं को मातृ दिवस की शुभकामनाएं देते हुए उन्हें प्रमाण पत्र एवं उपहार भेंट कर सम्मानित किय...

युवा पीढ़ी के लिए मिसाल बने सनबीम स्कूल के टॉपर गोपाल कृष्णन | AARCC LIVE NEWS VARANASI

  96.8% अंक हासिल कर बढ़ाया विद्यालय और परिवार का गौरव, सफलता का श्रेय दिया माँ, भगवद्गीता और हनुमान चालीसा को  रिपोर्ट/आलोक चतुर्वेदी/सचिन देव Sunbeam School Bhagwanpur के मेधावी छात्र Gopal Krishnan ने सीबीएसई 12वीं (विज्ञान-पीसीबी) परीक्षा में 96.8% अंक प्राप्त कर विद्यालय, परिवार और समाज का नाम रोशन किया है। अपनी सफलता से उन्होंने यह साबित कर दिया कि अनुशासन, नियमित अध्ययन और सकारात्मक सोच के बल पर हर लक्ष्य हासिल किया जा सकता है। गोपाल कृष्णन की सफलता की कहानी केवल अच्छे अंकों तक सीमित नहीं है, बल्कि यह आज की युवा पीढ़ी के लिए प्रेरणा का संदेश भी देती है। उन्होंने अपनी सफलता का सबसे बड़ा श्रेय अपनी माताजी पूजा जी, नियमित संध्या वंदना, Bhagavad Gita और Hanuman Chalisa के पाठ को दिया। गोपाल का मानना है कि आध्यात्मिक गतिविधियाँ मानसिक एकाग्रता बढ़ाने और सकारात्मक ऊर्जा देने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाती हैं।  बचपन से ही रहा शानदार शैक्षणिक रिकॉर्ड  गोपाल के पिता अखिलेश कुमार राय ओमान के स्वास्थ्य मंत्रालय में चीफ फार्मासिस्ट ऑफिसर के पद पर कार्यरत हैं। प्रारंभिक शिक...

पुरुषोत्तम मास में श्रीमद्भागवत कथा के तृतीय दिवस में गूँजा वैराग्य, साधना और ईश्वरीय विश्वास का संदेश | AARCC LIVE NEWS VARANASI

 रिपोर्ट/आलोक चतुर्वेदी वाराणसी, 23 मई 2026। सामाजिक सेवा के लिए समर्पित संस्था संस्कृति सेवा न्यास द्वारा पुरुषोत्तम मास के अंतर्गत आयोजित श्रीमद्भागवत महापुराण कथा ज्ञान-यज्ञ के तृतीय दिवस पर श्रद्धा, भक्ति और आध्यात्मिक चेतना का अनुपम संगम देखने को मिला। कथा व्यास डॉ. अनुरंजिका चतुर्वेदी ने अपने ओजस्वी प्रवचनों के माध्यम से जीवन के गूढ़ आध्यात्मिक रहस्यों का सरल एवं प्रभावशाली विवेचन किया। कथा के दौरान राजा परीक्षित द्वारा पूछे गए प्रश्न — “मरणासन्न व्यक्ति को क्या करना चाहिए?” — का उत्तर देते हुए डॉ. चतुर्वेदी ने कहा कि प्रत्येक मनुष्य को राग-द्वेष से मुक्त होकर महर्षि पतंजलि के सूत्र “योगश्चित्तवृत्ति निरोधः” का अनुसरण करना चाहिए। उन्होंने बताया कि आसन, ध्यान, धारणा, समाधि, यम, नियम एवं प्रत्याहार जैसे योग के अंगों को जीवन में अपनाकर व्यक्ति संयमित और संतुलित जीवन जी सकता है। इच्छाओं पर नियंत्रण रखते हुए अपकर्मों से दूर रहना और ईश्वर की आराधना में स्वयं को निरंतर संलग्न रखना ही मानव जीवन की सार्थकता है। कथा के दूसरे प्रसंग में उन्होंने सृष्टि की उत्पत्ति का वर्णन करते हुए कहा ...