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AARCC LIVE NEWS VARANASI || आईयूसीटीई में पाँच दिवसीय अंतरराष्ट्रीय कार्यशाला का समापन, नवाचार आधारित शिक्षण पर हुआ मंथन


रिपोर्ट:-आलोक चतुर्वेदी 

 वाराणसी। अंतर विश्वविद्यालय अध्यापक शिक्षा केंद्र (आईयूसीटीई) में 20 फ़रवरी 2026 को “ट्रांसफॉर्मिंग पेडागॉजी इन हायर एजुकेशन: साइंसेज़, मैथमेटिक्स, सोशल साइंसेज़, ह्यूमैनिटीज़ एंड मैनेजमेंट” विषय पर आयोजित पाँच दिवसीय कार्यशाला का समापन सत्र संपन्न हुआ। कार्यक्रम का शुभारंभ डॉ. राजा पाठक द्वारा मंगलाचरण से हुआ। तत्पश्चात दीप प्रज्वलन एवं माँ सरस्वती तथा पंडित मदन मोहन मालवीय की प्रतिमा पर पुष्पांजलि अर्पित की गई।


समापन सत्र की मुख्य अतिथि प्रो. अनु सिंह लाथर, कुलपति, डॉ. बी.आर. अम्बेडकर यूनिवर्सिटी, दिल्ली रहीं तथा अध्यक्षता प्रो. प्रेम नारायण सिंह, निदेशक, आईयूसीटीई, वाराणसी ने की। प्रो. आशीष श्रीवास्तव, डीन (शैक्षणिक एवं अनुसंधान) ने स्वागत वक्तव्य दिया, जबकि संचालन डॉ. ज्ञानेंद्र सिंह, सहायक आचार्य ने किया।


मुख्य अतिथि प्रो. अनु सिंह लाथर ने अपने संबोधन में कहा कि शिक्षण पद्धतियाँ केवल कक्षा तक सीमित नहीं हैं, बल्कि कक्षा के बाहर भी उनकी महत्वपूर्ण भूमिका होती है। उन्होंने समावेशिता, नैतिक मूल्यों और बालिका शिक्षा के महत्व पर बल देते हुए कहा कि विकसित भारत के निर्माण हेतु इन मूल्यों को शिक्षा प्रणाली का अभिन्न हिस्सा बनाना आवश्यक है।


अध्यक्षीय उद्बोधन में प्रो. प्रेम नारायण सिंह ने कार्यक्रम के सफल आयोजन पर सभी प्रतिभागियों और संकाय सदस्यों को बधाई दी। उन्होंने कहा कि इस प्रकार की कार्यशालाएँ उच्च शिक्षा में गुणात्मक सुधार की दिशा में सार्थक पहल हैं और शिक्षण-अधिगम प्रक्रिया को सुदृढ़ बनाने में सहायक सिद्ध होती हैं।


प्रथम तकनीकी सत्र में प्रो. कार्तिक दवे (डॉ. बी.आर. अम्बेडकर यूनिवर्सिटी, दिल्ली) ने “पेडागॉजिकल इनोवेशन इन मैनेजमेंट: क्रिटिकल थिंकिंग एंड रियल-वर्ल्ड इन्क्वायरी” विषय पर व्याख्यान देते हुए कहा कि आधुनिक प्रबंधन शिक्षा में नवाचार, आलोचनात्मक चिंतन और वास्तविक जीवन की समस्याओं पर आधारित अध्ययन अत्यंत आवश्यक है। द्वितीय सत्र में प्रो. अनु सिंह लाथर ने “इनोवेशन इन इंटरडिसिप्लिनरी पेडागॉजी: ब्रिजिंग साइंसेज़, सोशल साइंसेज़, ह्यूमैनिटीज़ एंड मैनेजमेंट” विषय पर विचार रखते हुए बताया कि आज विश्वविद्यालयों में अंतर्विषयक शिक्षण पद्धति को बढ़ावा दिया जा रहा है, जिससे छात्रों को बहुआयामी दृष्टिकोण प्राप्त हो सके।


इस अवसर पर ‘लाइफ साइंसेज़ पेडागॉजी’ नामक पुस्तक का विमोचन भी किया गया, जिसका संपादन डॉ. कुशाग्री सिंह (आईयूसीटीई, वाराणसी) ने किया है। पाँच दिवसीय इस कार्यशाला में बिहार, दिल्ली, गुजरात, झारखंड और उत्तर प्रदेश सहित 10 राज्यों के 40 से अधिक प्रतिभागियों ने भाग लिया। कार्यक्रम का सफल संयोजन आईयूसीटीई के समस्त संकाय सदस्यों द्वारा किया गया।



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