सीधे मुख्य सामग्री पर जाएं

वाराणसी में आयोजित यूपी स्टेट कॉम्बैट मार्शल आर्ट्स चैंपियनशिप, 200 खिलाड़ियों ने लिया हिस्सा

रिपोर्ट/ आलोक चतुर्वेदी

 वाराणसी। विश्वकर्मा मार्शल आर्ट्स द्वारा आज दिनांक 23 नवंबर 2025, रविवार को यूपी स्टेट कॉम्बैट मार्शल आर्ट्स चैंपियनशिप का आयोजन रॉयल पैलेस, दानियालपुर, नक्खी घाट में किया गया। इस प्रतियोगिता में सोनभद्र, अमेठी, सिद्धार्थनगर और वाराणसी जिले के लगभग 200 प्रतिभागियों ने हिस्सा लिया।


प्रतियोगिता में फाइट, काता, जिम्नास्टिक और वेपंस की विभिन्न श्रेणियों में प्रतिभागियों ने उत्कृष्ट प्रदर्शन किया। विजेताओं को गोल्ड, सिल्वर और ब्रॉन्ज मेडल ग्रैंड मास्टर श्री मुकेश राठौड़ के द्वारा प्रदान किए गए।



ओवरऑल चैंपियन ट्रॉफी संदीप प्रजापति को प्रदान की गई।

दूसरा स्थान साहिल मौर्या ने प्राप्त किया तथा तीसरा स्थान करन भारद्वाज को मिला।


कार्यक्रम में अतिथि ग्रैंड मास्टर श्री मुकेश राठौड़ को अंगवस्त्रम एवं स्मृति चिन्ह विश्वकर्मा मार्शल आर्ट्स के संस्थापक श्री रमाशंकर विश्वकर्मा द्वारा प्रदान किया गया।

स्थानीय पार्षद जितेंद्र कुशवाहा का माल्यार्पण एवं स्मृति चिन्ह उपाध्यक्ष गोविंद विश्वकर्मा ने किया।

कारगिल योद्धा अजय कुमार सिंह का सम्मान श्री राजेश्वर मौर्या द्वारा किया गया।



रेफरी की भूमिका में

सत्या सिंह, बेबी, खुशी, साधना, पलक, अनुश्री, अंकिता, तेजस्विनी, संदीप प्रजापति, संदीप रॉय, दीपू, साहिल, करन, रेहान शामिल रहे।


विशेष सहयोग

आकाश, अवधेश, परमतोष, शिवम उपाध्याय, संजय शाह का रहा।



कार्यक्रम का संचालन विवेक विश्वकर्मा द्वारा किया गया।



टिप्पणियाँ

इस ब्लॉग से लोकप्रिय पोस्ट

मातृ दिवस समारोह में माताओं का हुआ सम्मान, बच्चों ने आरती उतारकर व्यक्त किया प्रेम और सम्मान | Aarcc Live News Varanasi

आर्क लाइव:-आलोक चतुर्वेदी/सचिनदेव   वाराणसी। श्री हरि धर्म विज्ञान सेवा संस्थान में संस्थापिका स्वर्गीय आशा देवी पाठक की स्मृति में मातृ दिवस समारोह का आयोजन बड़े ही उत्साह एवं श्रद्धा के साथ किया गया। कार्यक्रम का शुभारंभ प्रबंधक पंडित शिवानंद पाठक एवं प्रधानाचार्य विनोद कुमार वर्मा द्वारा दीप प्रज्वलन तथा मां सरस्वती की प्रतिमा पर माल्यार्पण कर किया गया। इस अवसर पर सह निदेशक आशुतोष पाठक एवं सौरभ पाठक ने अपनी माताजी की प्रतिमा पर पुष्पांजलि अर्पित की। इसके पश्चात विद्यालय के बच्चों ने अपनी माताओं की आरती कर उनका सम्मान किया। कार्यक्रम में विद्यालय के शिक्षक-शिक्षिकाओं ने मातृ दिवस के महत्व पर प्रकाश डालते हुए कहा कि मां ममता, त्याग और निःस्वार्थ सेवा की प्रतिमूर्ति होती है तथा जीवन में संस्कारों का पहला पाठ मां ही सिखाती है। प्रधानाचार्य विनोद कुमार वर्मा ने बच्चों को संबोधित करते हुए कहा कि मां प्रेम, शांति और त्याग की साक्षात मूरत होती है। सह निदेशक आशुतोष पाठक एवं सौरभ पाठक ने सभी माताओं को मातृ दिवस की शुभकामनाएं देते हुए उन्हें प्रमाण पत्र एवं उपहार भेंट कर सम्मानित किय...

युवा पीढ़ी के लिए मिसाल बने सनबीम स्कूल के टॉपर गोपाल कृष्णन | AARCC LIVE NEWS VARANASI

  96.8% अंक हासिल कर बढ़ाया विद्यालय और परिवार का गौरव, सफलता का श्रेय दिया माँ, भगवद्गीता और हनुमान चालीसा को  रिपोर्ट/आलोक चतुर्वेदी/सचिन देव Sunbeam School Bhagwanpur के मेधावी छात्र Gopal Krishnan ने सीबीएसई 12वीं (विज्ञान-पीसीबी) परीक्षा में 96.8% अंक प्राप्त कर विद्यालय, परिवार और समाज का नाम रोशन किया है। अपनी सफलता से उन्होंने यह साबित कर दिया कि अनुशासन, नियमित अध्ययन और सकारात्मक सोच के बल पर हर लक्ष्य हासिल किया जा सकता है। गोपाल कृष्णन की सफलता की कहानी केवल अच्छे अंकों तक सीमित नहीं है, बल्कि यह आज की युवा पीढ़ी के लिए प्रेरणा का संदेश भी देती है। उन्होंने अपनी सफलता का सबसे बड़ा श्रेय अपनी माताजी पूजा जी, नियमित संध्या वंदना, Bhagavad Gita और Hanuman Chalisa के पाठ को दिया। गोपाल का मानना है कि आध्यात्मिक गतिविधियाँ मानसिक एकाग्रता बढ़ाने और सकारात्मक ऊर्जा देने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाती हैं।  बचपन से ही रहा शानदार शैक्षणिक रिकॉर्ड  गोपाल के पिता अखिलेश कुमार राय ओमान के स्वास्थ्य मंत्रालय में चीफ फार्मासिस्ट ऑफिसर के पद पर कार्यरत हैं। प्रारंभिक शिक...

पुरुषोत्तम मास में श्रीमद्भागवत कथा के तृतीय दिवस में गूँजा वैराग्य, साधना और ईश्वरीय विश्वास का संदेश | AARCC LIVE NEWS VARANASI

 रिपोर्ट/आलोक चतुर्वेदी वाराणसी, 23 मई 2026। सामाजिक सेवा के लिए समर्पित संस्था संस्कृति सेवा न्यास द्वारा पुरुषोत्तम मास के अंतर्गत आयोजित श्रीमद्भागवत महापुराण कथा ज्ञान-यज्ञ के तृतीय दिवस पर श्रद्धा, भक्ति और आध्यात्मिक चेतना का अनुपम संगम देखने को मिला। कथा व्यास डॉ. अनुरंजिका चतुर्वेदी ने अपने ओजस्वी प्रवचनों के माध्यम से जीवन के गूढ़ आध्यात्मिक रहस्यों का सरल एवं प्रभावशाली विवेचन किया। कथा के दौरान राजा परीक्षित द्वारा पूछे गए प्रश्न — “मरणासन्न व्यक्ति को क्या करना चाहिए?” — का उत्तर देते हुए डॉ. चतुर्वेदी ने कहा कि प्रत्येक मनुष्य को राग-द्वेष से मुक्त होकर महर्षि पतंजलि के सूत्र “योगश्चित्तवृत्ति निरोधः” का अनुसरण करना चाहिए। उन्होंने बताया कि आसन, ध्यान, धारणा, समाधि, यम, नियम एवं प्रत्याहार जैसे योग के अंगों को जीवन में अपनाकर व्यक्ति संयमित और संतुलित जीवन जी सकता है। इच्छाओं पर नियंत्रण रखते हुए अपकर्मों से दूर रहना और ईश्वर की आराधना में स्वयं को निरंतर संलग्न रखना ही मानव जीवन की सार्थकता है। कथा के दूसरे प्रसंग में उन्होंने सृष्टि की उत्पत्ति का वर्णन करते हुए कहा ...