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संस्कृति सेवा न्यास द्वारा श्रीमद्भागवत महापुराण पाठ एवं कथा ज्ञान-यज्ञ का शुभारंभ | AARCC LIVE वाराणसी


 आर्क लाइव / आलोक चतुर्वेदी  

वाराणसी। संस्कृति सेवा न्यास द्वारा अधिक मास के अंतर्गत आयोजित श्रीमद्भागवत महापुराण पाठ एवं कथा ज्ञान-यज्ञ का शुभारंभ दिनांक 21 मई 2026 को श्रद्धा एवं भक्तिभाव के साथ संपन्न हुआ। कार्यक्रम के प्रथम दिवस भागवत मर्मज्ञ डॉ. अनुरंजिका चतुर्वेदी ने श्रद्धालुओं को संबोधित करते हुए कहा कि श्रीमद्भागवत कथा व्यक्ति की मति को बदलकर उसकी मानवीय गति को विकास की ओर अग्रसर करती है।

उन्होंने कहा कि जिस घर, गांव, नगर अथवा समाज में श्रीमद्भागवत कथा का आयोजन होता है, वहां कलियुग अपने दुष्प्रभावों को पूर्ण रूप से स्थापित नहीं कर पाता। कथा मनुष्य को व्यक्तिगत स्वार्थ का त्याग कर ज्ञान और भक्ति की धारा में प्रवाहित होने तथा संवेदनशील एवं आदर्श जीवन अपनाने की प्रेरणा देती है।




डॉ. चतुर्वेदी ने भागवत के चारों वर्णों की व्याख्या करते हुए बताया कि ‘भा’ आध्यात्म, ज्ञान और तेज का प्रकाश प्रदान करता है, ‘ग’ गंगा के समान पवित्रता एवं गणेश जी की तरह विघ्नों का नाश कर संसार के जन्म-मरण से मुक्ति का मार्ग प्रशस्त करता है। वहीं ‘व’ व्रत एवं वामन की भांति लघुता में भी श्रेष्ठता का संदेश देता है तथा ‘त’ सांसारिक तापों से मुक्ति दिलाकर भवसागर से पार लगाने का कार्य करता है।

उन्होंने कहा कि इन सभी गुणों के समन्वय के कारण व्यास जी ने इसे “भागवत” नाम प्रदान किया तथा अन्य पुराणों की अपेक्षा इसे सर्वोपरि एवं कलियुग में पापों का नाश करने वाली कथा बताया।

कार्यक्रम में बड़ी संख्या में श्रद्धालु उपस्थित रहे और भक्ति भाव से कथा श्रवण कर धर्मलाभ प्राप्त किया।





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