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युवा पीढ़ी के लिए मिसाल बने सनबीम स्कूल के टॉपर गोपाल कृष्णन | AARCC LIVE NEWS VARANASI

 

96.8% अंक हासिल कर बढ़ाया विद्यालय और परिवार का गौरव, सफलता का श्रेय दिया माँ, भगवद्गीता और हनुमान चालीसा को 

रिपोर्ट/आलोक चतुर्वेदी/सचिन देव

Sunbeam School Bhagwanpur के मेधावी छात्र Gopal Krishnan ने सीबीएसई 12वीं (विज्ञान-पीसीबी) परीक्षा में 96.8% अंक प्राप्त कर विद्यालय, परिवार और समाज का नाम रोशन किया है। अपनी सफलता से उन्होंने यह साबित कर दिया कि अनुशासन, नियमित अध्ययन और सकारात्मक सोच के बल पर हर लक्ष्य हासिल किया जा सकता है।

गोपाल कृष्णन की सफलता की कहानी केवल अच्छे अंकों तक सीमित नहीं है, बल्कि यह आज की युवा पीढ़ी के लिए प्रेरणा का संदेश भी देती है। उन्होंने अपनी सफलता का सबसे बड़ा श्रेय अपनी माताजी पूजा जी, नियमित संध्या वंदना, Bhagavad Gita और Hanuman Chalisa के पाठ को दिया। गोपाल का मानना है कि आध्यात्मिक गतिविधियाँ मानसिक एकाग्रता बढ़ाने और सकारात्मक ऊर्जा देने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाती हैं।

 बचपन से ही रहा शानदार शैक्षणिक रिकॉर्ड 

गोपाल के पिता अखिलेश कुमार राय ओमान के स्वास्थ्य मंत्रालय में चीफ फार्मासिस्ट ऑफिसर के पद पर कार्यरत हैं। प्रारंभिक शिक्षा ओमान में प्राप्त करने के बाद गोपाल अपनी माता और बड़ी बहन के साथ वाराणसी आए। एक वर्ष Sunbeam School Indiranagar में अध्ययन करने के बाद उन्होंने छठवीं कक्षा में सनबीम स्कूल भगवानपुर में प्रवेश लिया।

इससे पहले वर्ष 2024 में सीबीएसई 10वीं परीक्षा में भी गोपाल ने 98% अंक प्राप्त कर स्कूल टॉपर बनने का गौरव हासिल किया था। उनकी इस निरंतर सफलता के पीछे उनकी माताजी पूजा जी की महत्वपूर्ण भूमिका रही है, जो बच्चों के सर्वांगीण विकास और संस्कारयुक्त शिक्षा को सर्वोच्च प्राथमिकता देती हैं।

 माँ की सीख बनी सफलता की कुंजी 

गोपाल की माताजी पूजा जी का मानना है कि बच्चों के अच्छे संस्कार और उज्ज्वल भविष्य के लिए माता-पिता का समय और मार्गदर्शन सबसे जरूरी है। उन्होंने अपने बच्चों को शुरुआती शिक्षा स्वयं दी और मोबाइल, टीवी तथा अनावश्यक गैजेट्स से दूर रखते हुए अनुशासित दिनचर्या अपनाने के लिए प्रेरित किया।

पूजा जी बताती हैं कि बच्चों के अध्ययन के समय वे स्वयं भी उनके साथ बैठकर स्वाध्याय करती थीं। उन्होंने बच्चों को नियमित पढ़ाई, स्वावलंबन, समाजसेवा और देशप्रेम का संस्कार दिया। उनका कहना है कि केवल स्कूल, ट्यूशन और कोचिंग के भरोसे बच्चों का सम्पूर्ण विकास संभव नहीं है।

 जंक फूड और मोबाइल से दूरी 

आज के समय में जहां अधिकतर बच्चे फास्ट फूड और मोबाइल की दुनिया में व्यस्त रहते हैं, वहीं गोपाल ने इन चीजों से दूरी बनाकर अनुशासित जीवनशैली को अपनाया। वे नियमित अध्ययन के साथ खेलकूद और सांस्कृतिक गतिविधियों में भी सक्रिय रहते हैं।

गोपाल अपनी बड़ी बहन पूजा नंदिनी से भी काफी प्रेरित हैं, जो नीट परीक्षा उत्तीर्ण कर सरकारी मेडिकल कॉलेज से एमबीबीएस की पढ़ाई कर रही हैं।

 आध्यात्मिकता से मिलती है ऊर्जा 

गोपाल कृष्णन को बचपन से ही भगवद्गीता के कई अध्याय कंठस्थ हैं। वे नियमित रूप से हनुमान चालीसा और गीता पाठ करते हैं। उनका कहना है कि इससे मानसिक शांति, आत्मविश्वास और अध्ययन में एकाग्रता बढ़ती है।

उन्होंने कहा कि आध्यात्मिक अभ्यास में थोड़ा समय देने से पढ़ाई की क्षमता और ऊर्जा कई गुना बढ़ जाती है, जिससे कम समय में बेहतर परिणाम प्राप्त किए जा सकते हैं।

 देशसेवा का है सपना 

जहां आज अधिकांश युवा केवल बड़े पैकेज और नौकरी की ओर आकर्षित होते हैं, वहीं गोपाल कृष्णन समाज और राष्ट्र के लिए अधिकतम योगदान देने का सपना देखते हैं। उनका कहना है कि जीवन का उद्देश्य केवल व्यक्तिगत सफलता नहीं बल्कि समाज और देश की सेवा भी होना चाहिए।

गोपाल ने अपनी उपलब्धि का श्रेय अपने माता-पिता, परिवार, शिक्षकों और शुभचिंतकों को दिया है। लोगों का मानना है कि गोपाल कृष्णन की मेहनत, अनुशासन और उनकी माताजी की कर्तव्यनिष्ठा आज की युवा पीढ़ी और मातृशक्ति दोनों के लिए प्रेरणास्रोत है।




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