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पुरुषोत्तम मास में श्रीमद्भागवत कथा के तृतीय दिवस में गूँजा वैराग्य, साधना और ईश्वरीय विश्वास का संदेश | AARCC LIVE NEWS VARANASI

 रिपोर्ट/आलोक चतुर्वेदी

वाराणसी, 23 मई 2026।

सामाजिक सेवा के लिए समर्पित संस्था संस्कृति सेवा न्यास द्वारा पुरुषोत्तम मास के अंतर्गत आयोजित श्रीमद्भागवत महापुराण कथा ज्ञान-यज्ञ के तृतीय दिवस पर श्रद्धा, भक्ति और आध्यात्मिक चेतना का अनुपम संगम देखने को मिला। कथा व्यास डॉ. अनुरंजिका चतुर्वेदी ने अपने ओजस्वी प्रवचनों के माध्यम से जीवन के गूढ़ आध्यात्मिक रहस्यों का सरल एवं प्रभावशाली विवेचन किया।

कथा के दौरान राजा परीक्षित द्वारा पूछे गए प्रश्न — “मरणासन्न व्यक्ति को क्या करना चाहिए?” — का उत्तर देते हुए डॉ. चतुर्वेदी ने कहा कि प्रत्येक मनुष्य को राग-द्वेष से मुक्त होकर महर्षि पतंजलि के सूत्र “योगश्चित्तवृत्ति निरोधः” का अनुसरण करना चाहिए। उन्होंने बताया कि आसन, ध्यान, धारणा, समाधि, यम, नियम एवं प्रत्याहार जैसे योग के अंगों को जीवन में अपनाकर व्यक्ति संयमित और संतुलित जीवन जी सकता है। इच्छाओं पर नियंत्रण रखते हुए अपकर्मों से दूर रहना और ईश्वर की आराधना में स्वयं को निरंतर संलग्न रखना ही मानव जीवन की सार्थकता है।

कथा के दूसरे प्रसंग में उन्होंने सृष्टि की उत्पत्ति का वर्णन करते हुए कहा कि परब्रह्म ने एक से अनेक होने की इच्छा से सृष्टि की रचना की। नारायण ने मनु और शतरूपा के माध्यम से इस संसार के मायाजाल का निर्माण किया और अपनी शक्तिस्वरूपा भगवती माया से सम्पूर्ण जगत को आच्छादित कर दिया। उन्होंने शास्त्रों का उल्लेख करते हुए कहा —

“विष्णोर्माया भगवती यया सम्मोहितं जगत्”

अर्थात सम्पूर्ण चराचर जगत उसी माया के प्रभाव में संचालित है।

तीसरे प्रसंग में डॉ. चतुर्वेदी ने ध्रुव चरित्र का उल्लेख करते हुए कहा कि मनुष्य के जीवन में जो भी घटित होता है, वह अंततः उसके कल्याण के लिए ही होता है। कभी-कभी परिस्थितियाँ तत्काल प्रतिकूल प्रतीत होती हैं, किंतु समय आने पर वही घटनाएँ ईश्वर की कृपा का माध्यम बनती हैं। उन्होंने कहा कि बालक ध्रुव, जो पिता की गोद के लिए तरसता रहा, वही अपनी अटूट भक्ति के बल पर स्वयं भगवान नारायण की गोद में स्थान प्राप्त कर अमर ध्रुव तारे के रूप में विख्यात हुआ। उन्होंने कहा कि जीवन में यदि कहीं मान-अपमान या अधिकारों का हनन हो, तो यह समझना चाहिए कि उसके पीछे भी ईश्वर की कोई शुभ योजना छिपी होती है।

कार्यक्रम के प्रारंभ में गोपालगंज (बिहार) से पधारी श्रीमती प्रतिभा सिंह ने व्यास पूजन किया, जबकि तृतीय दिवस की कथा विराम आरती डॉ. श्रीमती सविता चतुर्वेदी द्वारा उतारी गई।

कथामृत का रसपान करने वालों में जौनपुर के समाजसेवी शशिकांत शुक्ल सपत्नीक, राँची (बिहार) की श्रीमती रश्मि मिश्रा, मऊ की श्रीमती माया उपाध्याय एवं सुशील उपाध्याय, वाराणसी के वेदप्रकाश सिंह, डी.पी. सिंह, आचार्य अविनाश चतुर्वेदी, श्रीमती नेहा मिश्रा ज्योतिषी, श्री नाथ तिवारी, नीरज जी सहित अनेक गणमान्य नागरिक उपस्थित रहे।




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