पुरुषोत्तम मास में श्रीमद्भागवत कथा के चतुर्थ दिवस में जीव और ब्रह्म के संबंध का हुआ भावपूर्ण वर्णन | AARCC LIVE NEWS VARANASI
रिपोर्ट/आलोक चतुर्वेदी/सचिन देव
वाराणसी, 24 मई 2026।
भारतीय संस्कृति एवं संस्कारों के संरक्षण तथा सामाजिक सेवा के लिए समर्पित संस्कृति सेवा न्यास द्वारा पुरुषोत्तम मास के अवसर पर आयोजित श्रीमद्भागवत कथा ज्ञान-यज्ञ के चतुर्थ दिवस पर श्रद्धालुओं ने भक्ति एवं आध्यात्मिक रस का आनंद लिया। कथा व्यास भागवत मर्मज्ञ डॉ. अनुरंजिका चतुर्वेदी ने पुरंजन और अभिज्ञात के प्रसंग के माध्यम से जीव और परब्रह्म के गूढ़ संबंध का सरल एवं भावपूर्ण वर्णन किया।
डॉ. चतुर्वेदी ने कहा कि पुरंजन रूपी जीव संसार रूपी नगर में भ्रमण के लिए आता है, किन्तु माया के आकर्षण में पड़कर उसी में रम जाता है और अपने वास्तविक धाम को भूल जाता है। समय बीतने पर जब अभिज्ञात रूपी परब्रह्म उसे उसके वास्तविक स्वरूप और उद्देश्य का स्मरण कराता है, तब जीव को पश्चाताप होता है कि वह मानव जीवन का वास्तविक उद्देश्य भूलकर सांसारिक मोह-माया में उलझ गया। उन्होंने कहा कि प्रत्येक मनुष्य पुरंजन है और अभिज्ञात स्वयं ईश्वर हैं, जो समय-समय पर आत्मचिंतन के लिए प्रेरित करते हैं।
दूसरे प्रसंग में उन्होंने भक्त प्रहलाद के जीवन का उल्लेख करते हुए कहा कि यदि मनुष्य में अटूट श्रद्धा और सहनशीलता हो, तो वह विषम परिस्थितियों में भी ईश्वर भक्ति के बल पर असंभव को संभव बना सकता है। उन्होंने कहा कि प्रहलाद ने अपनों के अत्याचार और असहनीय कष्टों के बीच भी अपने इष्ट का स्मरण नहीं छोड़ा और अंततः ईश्वर की परम कृपा प्राप्त कर इतिहास रचा।
कथा के समापन से पूर्व भगवान श्रीकृष्ण का जन्मोत्सव धूमधाम से मनाया गया। इस अवसर पर डॉ. चतुर्वेदी ने कहा कि भगवान श्रीकृष्ण स्वयं सृष्टि के पालनहार होते हुए भी उनके माता-पिता को अत्यंत कष्टों का सामना करना पड़ा। इससे यह स्पष्ट होता है कि ईश्वर की विशेष कृपा प्राप्त करने वाले व्यक्तियों को जीवन में अनेक कठिन परीक्षाओं से गुजरना पड़ता है।
कथा के दौरान भजनों की मधुर प्रस्तुति से श्रद्धालु भावविभोर हो उठे। संतोष तिवारी ने हारमोनियम के साथ गायन प्रस्तुत किया, जबकि तबले पर राजीव झा एवं ऑर्गन पर चन्द्रप्रकाश ने संगत दी। कथा प्रारंभ में व्यास पूजन श्रीमती सुशीला यादव द्वारा तथा समापन आरती श्रीमती माया उपाध्याय द्वारा संपन्न हुई।
कार्यक्रम में अभिनव चतुर्वेदी, डॉ. संजीव शर्मा, डी.पी. सिंह, श्रीमती शिमला त्रिपाठी, प्रगति द्विवेदी, शशिकांत शुक्ल, डॉ. अभिषेक, श्रीनाथ तिवारी, पं. आनंद तिवारी, नीरज मिश्र, श्रीमती गीता संसनवाल, ज्योति छिकारा, श्याम कुमारी पाठक, मार्कण्डेय जी एवं आनंद जी सहित अनेक गणमान्य नागरिक उपस्थित रहे।









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