दो दिवसीय एग्रो-इंडस्ट्री सम्मेलन–2026 का सफल समापन,नवाचार और स्मार्ट खेती पर रहा जोर | AARCC LIVE NEWS वाराणसी
रिपोर्ट:- आलोक चतुर्वेदी
वाराणसी। काशी हिन्दू विश्वविद्यालय के कृषि विज्ञान संस्थान में आयोजित “एग्रो-इंडस्ट्री, अकादमिया एवं किसान सम्मेलन–2026” का रविवार को सफलतापूर्वक समापन हो गया। दो दिवसीय इस सम्मेलन में कृषि, उद्योग और नवाचार के समन्वय पर व्यापक मंथन हुआ, जिसमें वैज्ञानिकों, विशेषज्ञों, किसानों और छात्रों ने सक्रिय भागीदारी की।
डॉ. एच. बी. सिंह ने “कृषि स्थिरता के लिए जैव-कीटनाशक नियम” विषय पर चर्चा करते हुए बताया कि देश में लगभग 970 माइक्रोबियल बायोपेस्टीसाइड्स पंजीकृत हैं और इनका उत्पादन तेजी से बढ़ रहा है। उन्होंने किसानों को ट्राइकोडर्मा जैसे जैविक फफूंदनाशक के उपयोग की सलाह दी, जो मिट्टी एवं बीज जनित रोगों को नियंत्रित कर फसल की उत्पादकता बढ़ाने में सहायक है।
दूसरे पैनल में प्रो. जे. पी. लाल, प्रो. अमिताभ रक्षित, प्रो. आर. के. दुअरी, प्रो. अमित कुमार, डॉ. सुनील कुमार, डॉ. प्रगति श्रीवास्तव सहित अन्य विशेषज्ञों ने “उन्नत प्रौद्योगिकी और स्मार्ट खेती” पर चर्चा की। इसमें प्रिसिशन फार्मिंग, कृत्रिम बुद्धिमत्ता, ड्रोन आधारित निगरानी और आधुनिक कृषि यंत्रों के उपयोग को खेती में लाभ बढ़ाने का प्रमुख माध्यम बताया गया।
समापन समारोह में मुख्य अतिथि डॉ. के. के. सिंह ने छोटे एवं सीमांत किसानों के लिए कृषि मशीनरी कस्टम हायरिंग सेंटर की स्थापना पर जोर दिया। उन्होंने महिला किसानों के प्रशिक्षण, प्रसंस्करण उद्योग और कौशल विकास कार्यक्रमों को कृषि उन्नति का आधार बताया।
विशिष्ट अतिथि डॉ. यू. एस. गौतम ने महिला किसानों की बढ़ती भागीदारी को सकारात्मक संकेत बताते हुए FPO सशक्तिकरण, विपणन कौशल और उद्योग से जुड़ाव की आवश्यकता पर बल दिया। वहीं डॉ. एच. बी. सिंह ने कृषि उत्पादों के लिए भौगोलिक संकेत (GI) टैग की जरूरत बताई।
अध्यक्षता करते हुए प्रो. यू. पी. सिंह ने कहा कि कृषि क्षेत्र की प्रमुख चुनौतियां मानसून, मानव संसाधन और बाजार हैं, जिनके समाधान के लिए संरक्षित खेती, एकीकृत कृषि प्रणाली (IFS) और उद्यमिता विकास महत्वपूर्ण विकल्प हैं।
कार्यक्रम के सफल संचालन में आयोजन सचिव प्रो. मनोज कुमार सिंह, कोषाध्यक्ष डॉ. एस. पी. सिंह एवं सत्र संयोजक प्रो. अमिताभ रक्षित की महत्वपूर्ण भूमिका रही। मंच संचालन डॉ. अफ़ज़ल एवं डॉ. शिखा ने किया, जबकि मीडिया समन्वय डॉ. ओ. पी. सिंह, डॉ. सर्वेश कुमार, डॉ. आशीष लटारे एवं डॉ. तरुण ने संभाला। अंत में धन्यवाद ज्ञापन डॉ. सुभदीप रॉय ने किया।











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