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कवयित्री झरना मुखर्जी के काव्य-संग्रह ‘वासंती मन का उत्सव’ का भव्य विमोचन | AARCC LIVE NEWS VARANASI

रिपोर्ट/आलोक चतुर्वेदी

 वाराणसी।

बरेका स्थित एक सभागार में नादान परिंदे साहित्य मंच एवं काशी काव्य संगम के संयुक्त तत्वावधान में प्रख्यात कवयित्री झरना मुखर्जी के काव्य-संग्रह ‘वासंती मन का उत्सव’ का भव्य विमोचन समारोहपूर्वक संपन्न हुआ। कार्यक्रम में साहित्य प्रेमियों, कवियों एवं बुद्धिजीवियों की उल्लेखनीय उपस्थिति रही।

कार्यक्रम के मुख्य अतिथि केशव जालान रहे, जबकि अध्यक्षता वरिष्ठ साहित्यकार हीरालाल मिश्र ‘मधुकर’ ने की। विशिष्ट अतिथियों में राम सुधार सिंह, वेद प्रकाश पांडेय, मुक्ता जी, महेंद्र अलंकार, कंचन सिंह परिहार, नादान परिंदे साहित्य मंच के डॉ. सुभाष चंद्र तथा काशी काव्य संगम के अध्यक्ष आलोक सिंह ‘बेताब’ शामिल रहे। अतिथियों ने संयुक्त रूप से दीप प्रज्वलन कर कार्यक्रम का शुभारंभ किया।

कार्यक्रम की शुरुआत गणेश वंदना एवं सरस्वती वंदना से हुई। इसके पश्चात अतिथियों का स्वागत नादान परिंदे साहित्य मंच के राष्ट्रीय अध्यक्ष डॉ. सुभाष चंद्र द्वारा किया गया।

अपने वक्तव्य में कवयित्री झरना मुखर्जी ने बताया कि ‘वासंती मन का उत्सव’ काव्य-संग्रह का विषय-विस्तार अत्यंत वैविध्यपूर्ण है। इसमें प्रेम की सुख-दुःख अनुभूतियों के साथ-साथ राष्ट्रप्रेम, पर्यावरण संरक्षण, समकालीन सामाजिक विसंगतियाँ, लोककथाओं से जुड़ाव तथा व्यक्तिगत संवेदनाओं को प्रभावशाली ढंग से प्रस्तुत किया गया है। उन्होंने कहा कि जीवन के थपेड़ों से आहत कवि का मन भी उसी वासंती मन की छांव में उत्सव मनाना चाहता है, और यही भाव इस संग्रह की कविताओं की आत्मा है।

इस अवसर पर सुरैया आज़ाद, नसीम निशा, निकिता सिंह, मधुलिका राय, पूनम श्रीवास्तव, वत्सला श्रीवास्तव, सुषमा मिश्रा, माधुरी मिश्रा, गिरीश पांडे ‘काशिकेय’, सिद्धनाथ शर्मा ‘सिद्ध’, अख़लाक खान भारती, जयप्रकाश मिश्रा ‘धानापुरी’, शमीम गाज़ीपुरी, अल्ताफ़ हुसैन सहित अनेक साहित्यकार एवं साहित्य प्रेमी उपस्थित रहे।

कार्यक्रम का संचालन शरद श्रीवास्तव ‘शरद’ ने किया, जबकि धन्यवाद ज्ञापन अख़लाक भारती द्वारा प्रस्तुत किया गया।




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