सीधे मुख्य सामग्री पर जाएं

सनबीम लहरतारा में 21 से 23 नवम्बर तक राउंड स्क्वेयर इंटरनेशनल कॉन्फ्रेंस का सफल आयोजन

 


वाराणसी:रिपोर्ट/आलोक चतुर्वेदी 


वाराणसी|तीन दिवसीय इस अंतरराष्ट्रीय कॉन्फ्रेंस में साउथ एशिया एवं गल्फ क्षेत्र सहित चार देशों के 60 राउंड स्क्वेयर मान्यता प्राप्त विद्यालयों के 130 प्रतिनिधियों ने सक्रिय सहभागिता की।


यह कॉन्फ्रेंस राउंड स्क्वेयर की सीईओ सुश्री रशैल वेस्टगार्थ (यूके), स्कूल सपोर्ट डायरेक्टर सुश्री राजबीर संधू तथा एग्जीक्यूटिव असिस्टेंट सुश्री सारा मैक्गिल के निर्देशन में संचालित हुआ।

यह फ़ोरम विशेष रूप से दक्षिण एशिया और खाड़ी क्षेत्र के राउंड स्क्वेयर सदस्य विद्यालयों के स्कूल प्रमुखों एवं राउंड स्क्वेयर समन्वयकों के लिए आयोजित किया जाता है। तीन दिवसीय इस अंतरराष्ट्रीय कॉन्फ्रेंस का उद्देश्य विद्यालय नेतृत्व को वार्षिक मंच उपलब्ध कराना है, जहाँ वे शिक्षा से जुड़े उत्कृष्ट अभ्यास, नवीन रणनीतियाँ साझा कर सकें, सदस्य स्कूलों के बीच सहयोग को सुदृढ़ बना सकें तथा राउंड स्क्वेयर के कार्यक्रमों और योजनाओं के विकास में सामूहिक योगदान दे सकें


राउंड स्क्वेयर की कार्यशालाएँ इसके छह प्रमुख IDEALS पर केंद्रित होती हैं—

अंतरराष्ट्रीयता (Internationalism), लोकतंत्र (Democracy), पर्यावरण संरक्षण (Environmental Stewardship), साहसिक गतिविधियाँ (Adventure), नेतृत्व (Leadership) और सेवा (Service) 


देश के विभिन्न राज्यों तथा अन्य देशों से पधारे अतिथियों का स्वागत सनबीम शिक्षण समूह की निदेशक श्रीमती अमृता बर्मन ने किया। अपने स्वागत संबोधन में उन्होंने कहा कि ऐसे कॉन्फ्रेंस शिक्षा का विकल्प नहीं, बल्कि वैश्विक शिक्षा का संकल्प हैं, जिनके माध्यम से हम समता और समानता के भाव को विश्वभर में स्थापित कर सकते हैं। स्वागत गान तथा बच्चों द्वारा प्रस्तुत सांस्कृतिक कार्यक्रम ने सभी प्रतिनिधियों का हृदय जीत लिया।





कार्यक्रम का औपचारिक शुभारंभ करते हुए सनबीम शिक्षण समूह के अध्यक्ष डॉ. दीपक मधोक एवं उपाध्यक्ष श्रीमती भारती मधोक ने सभी प्रतिनिधियों को बधाई एवं धन्यवाद ज्ञापित किया। उन्होंने कहा कि यह कॉन्फ्रेंस ‘वसुधैव कुटुम्बकम’ की पुनर्स्थापना की दिशा में एक महत्त्वपूर्ण कदम है। ऐसे वैश्विक मंच विचारों के आदान-प्रदान के माध्यम से भेदभाव मिटाकर वैश्विक एकता और सद्भाव की सार्थकता सिद्ध करते हैं। इन समागमों से प्रतिनिधियों को एक-दूसरे को जानने, समझने तथा एक-दूसरे की सांस्कृतिक विरासत का अध्ययन करने का अवसर प्राप्त होता है। शिक्षा का कोई विकल्प नहीं है, और ऐसे अंतरराष्ट्रीय संवाद ही सौहार्दपूर्ण एवं शांतिपूर्ण विश्व के निर्माण का मार्ग प्रशस्त करते हैं।


अंत में, सनबीम शिक्षण समूह के मानद निदेशक श्री हर्ष मधोक एवं सहायक निदेशिका श्रीमती प्रतिमा गुप्ता ने सभी प्रतिनिधियों को सहभागिता के लिए धन्यवाद दिया तथा भविष्य में सहयोग बनाए रखते हुए राउंड स्क्वेयर के उद्देश्यों की पूर्ति हेतु मिलकर कार्य करने का संकल्प पुनः दोहराया।


इस कॉन्फ्रेंस में देश के प्रतिष्ठित और ख्यातिप्राप्त विद्यालयों—जैसे मेयो कॉलेज, दून स्कूल, सिंधिया स्कूल, राजकुमार कॉलेज, मॉडर्न स्कूल, इंवेंचर अकादमी, वेल्हम सहित अन्य प्रमुख संस्थानों ने सक्रिय सहभागिता दर्ज की।





टिप्पणियाँ

इस ब्लॉग से लोकप्रिय पोस्ट

मातृ दिवस समारोह में माताओं का हुआ सम्मान, बच्चों ने आरती उतारकर व्यक्त किया प्रेम और सम्मान | Aarcc Live News Varanasi

आर्क लाइव:-आलोक चतुर्वेदी/सचिनदेव   वाराणसी। श्री हरि धर्म विज्ञान सेवा संस्थान में संस्थापिका स्वर्गीय आशा देवी पाठक की स्मृति में मातृ दिवस समारोह का आयोजन बड़े ही उत्साह एवं श्रद्धा के साथ किया गया। कार्यक्रम का शुभारंभ प्रबंधक पंडित शिवानंद पाठक एवं प्रधानाचार्य विनोद कुमार वर्मा द्वारा दीप प्रज्वलन तथा मां सरस्वती की प्रतिमा पर माल्यार्पण कर किया गया। इस अवसर पर सह निदेशक आशुतोष पाठक एवं सौरभ पाठक ने अपनी माताजी की प्रतिमा पर पुष्पांजलि अर्पित की। इसके पश्चात विद्यालय के बच्चों ने अपनी माताओं की आरती कर उनका सम्मान किया। कार्यक्रम में विद्यालय के शिक्षक-शिक्षिकाओं ने मातृ दिवस के महत्व पर प्रकाश डालते हुए कहा कि मां ममता, त्याग और निःस्वार्थ सेवा की प्रतिमूर्ति होती है तथा जीवन में संस्कारों का पहला पाठ मां ही सिखाती है। प्रधानाचार्य विनोद कुमार वर्मा ने बच्चों को संबोधित करते हुए कहा कि मां प्रेम, शांति और त्याग की साक्षात मूरत होती है। सह निदेशक आशुतोष पाठक एवं सौरभ पाठक ने सभी माताओं को मातृ दिवस की शुभकामनाएं देते हुए उन्हें प्रमाण पत्र एवं उपहार भेंट कर सम्मानित किय...

युवा पीढ़ी के लिए मिसाल बने सनबीम स्कूल के टॉपर गोपाल कृष्णन | AARCC LIVE NEWS VARANASI

  96.8% अंक हासिल कर बढ़ाया विद्यालय और परिवार का गौरव, सफलता का श्रेय दिया माँ, भगवद्गीता और हनुमान चालीसा को  रिपोर्ट/आलोक चतुर्वेदी/सचिन देव Sunbeam School Bhagwanpur के मेधावी छात्र Gopal Krishnan ने सीबीएसई 12वीं (विज्ञान-पीसीबी) परीक्षा में 96.8% अंक प्राप्त कर विद्यालय, परिवार और समाज का नाम रोशन किया है। अपनी सफलता से उन्होंने यह साबित कर दिया कि अनुशासन, नियमित अध्ययन और सकारात्मक सोच के बल पर हर लक्ष्य हासिल किया जा सकता है। गोपाल कृष्णन की सफलता की कहानी केवल अच्छे अंकों तक सीमित नहीं है, बल्कि यह आज की युवा पीढ़ी के लिए प्रेरणा का संदेश भी देती है। उन्होंने अपनी सफलता का सबसे बड़ा श्रेय अपनी माताजी पूजा जी, नियमित संध्या वंदना, Bhagavad Gita और Hanuman Chalisa के पाठ को दिया। गोपाल का मानना है कि आध्यात्मिक गतिविधियाँ मानसिक एकाग्रता बढ़ाने और सकारात्मक ऊर्जा देने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाती हैं।  बचपन से ही रहा शानदार शैक्षणिक रिकॉर्ड  गोपाल के पिता अखिलेश कुमार राय ओमान के स्वास्थ्य मंत्रालय में चीफ फार्मासिस्ट ऑफिसर के पद पर कार्यरत हैं। प्रारंभिक शिक...

पुरुषोत्तम मास में श्रीमद्भागवत कथा के तृतीय दिवस में गूँजा वैराग्य, साधना और ईश्वरीय विश्वास का संदेश | AARCC LIVE NEWS VARANASI

 रिपोर्ट/आलोक चतुर्वेदी वाराणसी, 23 मई 2026। सामाजिक सेवा के लिए समर्पित संस्था संस्कृति सेवा न्यास द्वारा पुरुषोत्तम मास के अंतर्गत आयोजित श्रीमद्भागवत महापुराण कथा ज्ञान-यज्ञ के तृतीय दिवस पर श्रद्धा, भक्ति और आध्यात्मिक चेतना का अनुपम संगम देखने को मिला। कथा व्यास डॉ. अनुरंजिका चतुर्वेदी ने अपने ओजस्वी प्रवचनों के माध्यम से जीवन के गूढ़ आध्यात्मिक रहस्यों का सरल एवं प्रभावशाली विवेचन किया। कथा के दौरान राजा परीक्षित द्वारा पूछे गए प्रश्न — “मरणासन्न व्यक्ति को क्या करना चाहिए?” — का उत्तर देते हुए डॉ. चतुर्वेदी ने कहा कि प्रत्येक मनुष्य को राग-द्वेष से मुक्त होकर महर्षि पतंजलि के सूत्र “योगश्चित्तवृत्ति निरोधः” का अनुसरण करना चाहिए। उन्होंने बताया कि आसन, ध्यान, धारणा, समाधि, यम, नियम एवं प्रत्याहार जैसे योग के अंगों को जीवन में अपनाकर व्यक्ति संयमित और संतुलित जीवन जी सकता है। इच्छाओं पर नियंत्रण रखते हुए अपकर्मों से दूर रहना और ईश्वर की आराधना में स्वयं को निरंतर संलग्न रखना ही मानव जीवन की सार्थकता है। कथा के दूसरे प्रसंग में उन्होंने सृष्टि की उत्पत्ति का वर्णन करते हुए कहा ...