पद्मश्री स्वामी शिवानंद जी महाराज की 131वीं जयंती पर सेवा, साधना और भक्ति का भव्य आयोजन | AARCC LIVE NEWS VARANASI
पद्मश्री स्वामी शिवानंद जी महाराज की 131वीं जयंती पर सेवा, साधना और भक्ति का संगम
वाराणसी, 7 अगस्त। दुर्गाकुंड स्थित धर्मसंघ मंडल में पद्मश्री स्वामी शिवानंद जी महाराज की 131वीं जयंती महोत्सव श्रद्धा, सेवा और आध्यात्मिक वातावरण के बीच मनाया जा रहा है। तीन दिवसीय इस आयोजन में धार्मिक अनुष्ठानों के साथ सांस्कृतिक कार्यक्रम, भजन, भागवत पाठ और जरूरतमंदों की सेवा प्रमुख आकर्षण बने हुए हैं।
शुक्रवार को उत्तर प्रदेश सरकार के आयुष मंत्री दयाशंकर मिश्र 'दयालु' ने विधि-विधान से पूजन-अर्चन कर कार्यक्रम का शुभारंभ किया। इस अवसर पर बड़ी संख्या में जरूरतमंद महिलाओं एवं पुरुषों को भंडारा, वस्त्र, दक्षिणा तथा खाद्य सामग्री वितरित की गई।
अपने संबोधन में आयुष मंत्री ने कहा कि पद्मश्री स्वामी शिवानंद जी महाराज का संपूर्ण जीवन योग, सादगी और मानव सेवा को समर्पित रहा। वे प्रतिदिन योग से अपने दिन की शुरुआत करते थे तथा गरीबों और विशेष रूप से कुष्ठ रोगियों की सेवा को अपना सर्वोच्च धर्म मानते थे। उनके जीवन से समाज को सेवा, अनुशासन और आध्यात्मिकता की प्रेरणा मिलती रहेगी।
आयोजन समिति के सदस्य अनिरुद्ध गायेन ने बताया कि महोत्सव का शुभारंभ 6 अगस्त को सांस्कृतिक कार्यक्रम, भजन और भागवत पाठ के साथ हुआ। 7 अगस्त को 'दरिद्र नारायण सेवा' के अंतर्गत लगभग 600 लोगों को भोजन कराया गया। शाम को गीता पाठ, भागवत पाठ और भजन संध्या का आयोजन किया गया।
उन्होंने बताया कि 8 अगस्त को प्रातः पूजा, हवन, यज्ञ एवं जप के साथ सांस्कृतिक कार्यक्रम होंगे तथा लगभग 300 संतों की सेवा की जाएगी। वहीं शाम को वृंदावन से पधार रहे भगवत प्रभु जी द्वारा भागवत कथा का आयोजन होगा, जिसके बाद प्रसिद्ध भजन गायक अनूप जलोटा भजनों की प्रस्तुति देंगे।
कार्यक्रम के सफल आयोजन में संयोजक पुरुषोत्तम भट्टाचार्य, अनिरुद्ध गायेन, हिरण्यमय मुखर्जी, शिप्रा देवी, तंद्रा कुंडू सहित अनेक श्रद्धालुओं का विशेष सहयोग रहा। प्रमुख सहयोगियों में जयदीप गुप्ता, सोमी मुखर्जी, अरुणिम भट्टाचार्य, शर्मिला सिन्हा, संजय सर्वज्ञ एवं फाल्गुनी भट्टाचार्य शामिल रहे।
स्वामी शिवानंद जी को वर्ष 2022 में योग और मानव सेवा के क्षेत्र में उल्लेखनीय योगदान के लिए पद्मश्री से सम्मानित किया गया था। उनका जीवन आज भी सेवा, अनुशासन और आध्यात्मिक साधना का प्रेरणास्रोत माना जाता है।


















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