वाराणसी में तीन दिवसीय 48वें UPISACON 2026 का समापन
विज्ञान, कौशल और शोध के तीन दिन: देशभर से जुटे 350 से अधिक प्रतिनिधियों और 150 विशेषज्ञ फैकल्टी ने किया आधुनिक एनेस्थीसियोलॉजी पर मंथन
इंडियन सोसाइटी ऑफ एनेस्थीसियोलॉजिस्ट्स (ISA) की उत्तर प्रदेश शाखा के 48वें वार्षिक सम्मेलन UPISACON 2026 का आज वाराणसी में समापन हो गया। 2 से 4 अक्टूबर तक बीएचयू के चिकित्सा विज्ञान संस्थान (IMS) के KN Udupa Auditorium में चले इस आयोजन में एनेस्थीसिया, क्रिटिकल केयर, पेन मेडिसिन, शोध और चिकित्सा शिक्षा के विशेषज्ञ एक मंच पर आए।
सम्मेलन का आयोजन आईएमएस, बीएचयू के एनेस्थीसियोलॉजी विभाग ने किया, जबकि मेजबानी ISA सिटी ब्रांच वाराणसी ने की। इस वर्ष का विषय था “Precision to Perfection: Personalising Care, Transforming Outcomes”।
तीन दिन में क्या-क्या हुआ
सम्मेलन में व्याख्यान, पैनल डिस्कशन, इंटरैक्टिव सत्र और केस-बेस्ड चर्चाओं के साथ कई हैंड्स-ऑन कार्यशालाएं हुईं। स्नातकोत्तर चिकित्सकों को वरिष्ठ विशेषज्ञों के साथ सीधे सीखने का मौका मिला। चर्चा के प्रमुख विषय ये रहे:
- एयरवे मैनेजमेंट
- रीजनल एनेस्थीसिया
- अल्ट्रासाउंड-गाइडेड प्रक्रियाएं
- पेन मेडिसिन
- रोगी सुरक्षा व साक्ष्य-आधारित चिकित्सा
- सिमुलेशन-आधारित प्रशिक्षण
शुभारंभ से जो संदेश निकला
सम्मेलन के शुभारंभ पर वक्ताओं ने कहा था कि एनेस्थीसियोलॉजी अब केवल ऑपरेशन थिएटर तक सीमित नहीं है। पेरिऑपरेटिव मेडिसिन, क्रिटिकल केयर, ट्रॉमा केयर, दर्द प्रबंधन, पुनर्जीवन और अंग प्रत्यारोपण में इसकी भूमिका लगातार बढ़ रही है।
“सुरक्षित शल्य चिकित्सा से लेकर गंभीर रूप से बीमार मरीजों की देखभाल, दर्द नियंत्रण और पुनर्जीवन तक, एनेस्थीसियोलॉजिस्ट आज समग्र स्वास्थ्य सेवा का एक अभिन्न अंग बन चुके हैं।”प्रो. (डॉ.) राजीव कुमार दुबे, अध्यक्ष, ISA उत्तर प्रदेश
उद्घाटन समारोह में आईएमएस के निदेशक डॉ. एस. एन. शंखवार, डीन डॉ. संजय गुप्ता, ISA National President प्रो. नवीन मल्होत्रा, ISA National Secretary डॉ. राजीव गुप्ता, विभागाध्यक्ष डॉ. ए. पी. सिंह और आयोजन सचिव डॉ. नीलेश श्रीवास्तव सहित कई वरिष्ठ चिकित्सक मौजूद रहे।







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