प्रसूतिकॉन-2.0: महिलाओं के स्वास्थ्य पर अंतर्राष्ट्रीय सम्मेलन, काशी हिन्दू विश्वविद्यालय, वाराणसी | AARCC LIVE NEWS
तीन दिन, एक मंच
शास्त्रीय आयुर्वेदिक दृष्टिकोण से लेकर समकालीन नैदानिक अभ्यास और अनुसंधान तक — मुख्य वक्ता, चिकित्सक, शोधकर्ता और प्रतिनिधि महिलाओं के स्वास्थ्य की प्रगति पर एक साथ चर्चा करेंगे।
कार्यक्रम
पूर्व-सम्मेलन कार्यशाला के बाद दो दिन का मुख्य वैज्ञानिक सम्मेलन।
7 अक्टूबर
लाइव सर्जिकल और चिकित्सीय प्रदर्शन:
शाल्य कर्म-I (लैप्रोस्कोपिक) — डॉ. मंदार मोहन रनाडे
शाल्य कर्म-II (योनि हिस्टेरेक्टॉमी) — डॉ. प्रेमराज खैरनार
विद्ध और अग्नि कर्म — डॉ. पुलक कान्ति कर
स्त्री रोग में मर्म चिकित्सा — प्रो. सुनील जोशी
8 अक्टूबर
पूर्ण सत्र और समानांतर वैज्ञानिक सत्र। हर आमंत्रित प्रस्तुति लगभग 30 मिनट की।
दोपहर 12:00–1:30 बजे उद्घाटन समारोह।
शाम को 'तालश्य नृत्य समूह' का सांस्कृतिक कार्यक्रम।
9 अक्टूबर
प्लेनरी, वैज्ञानिक और समानांतर सत्र।
जीवनशैली, मासिक धर्म स्वास्थ्य प्रथाओं, विवाह की आयु और प्रजनन जीवन पाठ्यक्रम कारकों पर पैनल चर्चा।
इसके बाद समापन सत्र।
प्रमुख वक्ता
आयुर्वेद, नैदानिक अभ्यास, अनुसंधान और प्रौद्योगिकी के विषयों पर आमंत्रित व्याख्यान।
8 अक्टूबर
- प्रो. किशोर पटवर्धन — आयुर्वेद के लिए नैदानिक अनुसंधान: विभिन्न अध्ययन डिज़ाइन
- डॉ. विशाखा अनु — स्त्रीरोग संबंधी कैंसर में निदान प्रोफाइलिंग
- प्रो. आशा श्रीधर — बांझपन प्रबंधन में नैदानिक अनुभव
- प्रो. जैस्मिन रितेश गुजराती — शैक्षणिक और नैदानिक अनुसंधान में कृत्रिम बुद्धिमत्ता
- डॉ. मंदार मोहन रनाडे — स्त्री रोग और प्रसूति विज्ञान में कानूनी पहलू
- डॉ. खिलेश्वरी पटेल — महिलाओं के स्वास्थ्य में भरतनाट्यम की चिकित्सीय क्षमता
- डॉ. जान्हवी मिश्रा — स्त्री रोग और प्रसूति में एकीकृत पद्धतियाँ
- प्रो. गीता पाटकी — हार्मोन से परे रजोनिवृत्ति
- प्रो. शिल्पा डोंगा — स्त्री रोग में बस्ती चिकित्सा: शास्त्रीय सिद्धांतों से नैदानिक अभ्यास तक
9 अक्टूबर
- प्रो. शिखा सचान — हालिया अपडेट्स
- डॉ. अख्तर अली — स्त्री रोग और प्रसूति में आनुवंशिक परीक्षण
- डॉ. प्रशांत डालवी — पोस्ट-ऑपरेटिव जटिलताएँ
- डॉ. हृदया टी. चंद्रन — निदान से परे: आयुर्वेद प्रजनन अभ्यास में नैदानिक निर्णय
- प्रो. भारती कुमारमंगलम — गर्भ संस्कार: घटक और नैदानिक अनुप्रयोग
- प्रो. आशीष वर्मा — गर्भाशय फाइब्रॉएड: सर्जरी से पहले और बाद में
समानांतर सत्रों में एआई, एपिजेनेटिक्स, गर्भ संस्कार, पंचकर्म, स्थानिक चिकित्सा और बांझपन पर मौखिक प्रस्तुतियाँ होंगी। सर्वश्रेष्ठ शोध-पत्र और पीजी/पीएचडी विद्वानों के लिए सर्वश्रेष्ठ शोध-प्रबंध पुरस्कार भी दिए जाएँगे।
उद्घाटन समारोह
8 अक्टूबर 2026, दोपहर 12:00 से 1:30 बजे · स्वतंत्रता भवन, बीएचयू, वाराणसी
आयोजन समिति
चित्र-दीर्घा
प्रेस वार्ता, समिति कक्ष, धन्वंतरि भवन, 3 अक्टूबर 2026। बड़े रूप में देखने के लिए चित्र पर टैप करें।

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