काशी में श्रीकाशीविद्वद्धर्मपरिषद् का भव्य अभिनन्दन समारोह, महारुद्र यज्ञ की पूर्णाहुति; सनातन धर्म के संरक्षण पर मंथन | AARCC LIVE NEWS VARANASI
काशी में श्रीकाशीविद्वद्धर्मपरिषद् का भव्य अभिनन्दन समारोह, हरिवंश पुराण कार्यशाला और महारुद्र यज्ञ की पूर्णाहुति
सनातन धर्म, संस्कृति एवं वैदिक परम्परा के संरक्षण में परिषद का विशिष्ट योगदान : स्वामी डॉ. अनिकेत शास्त्री
अभिनन्दन समारोह केवल कार्यक्रम नहीं, शक्ति-वर्धन का आधार : कुलपति प्रो. बिहारी लाल शर्मा
वाराणसी। सनातन धर्म, वैदिक परम्परा, शास्त्रीय ज्ञान और भारतीय संस्कृति के संरक्षण-संवर्धन के संकल्प के साथ श्रीकाशीविद्वद्धर्मपरिषद् द्वारा बुधवार को सम्पूर्णानन्द संस्कृत विश्वविद्यालय स्थित योगसाधना भवन में भव्य अभिनन्दन समारोह का आयोजन किया गया। कार्यक्रम के दौरान हरिवंश पुराण कार्यशाला के विशेष सत्र के साथ वेद विभाग द्वारा संचालित महारुद्र यज्ञ की पूर्णाहुति भी सम्पन्न हुई। आयोजन में देश के विभिन्न क्षेत्रों से आए संत-महात्माओं, विद्वानों, आचार्यों और गणमान्यजनों ने सहभागिता की।
श्री श्री 1008 श्री मौनी बाबा चैरिटेबल ट्रस्ट, काशी के माध्यम से संचालित श्रीकाशीविद्वद्धर्मपरिषद् के इस आयोजन में सनातन धर्म और वैदिक परम्परा के संरक्षण को लेकर महत्वपूर्ण विचार सामने आए। कार्यक्रम का पहला प्रमुख सत्र दोपहर 12:15 बजे हरिवंश पुराण कार्यशाला के विशेष सत्र के रूप में हुआ। इसी दौरान वेद विभाग की ओर से संचालित महारुद्र यज्ञ की पूर्णाहुति वैदिक विधि-विधान के साथ सम्पन्न हुई। इसके बाद अपराह्न 2:30 बजे भव्य अभिनन्दन समारोह आयोजित किया गया।
स्वामी डॉ. अनिकेत शास्त्री का किया गया अभिनन्दन
समारोह में मुख्य रूप से राष्ट्रीय अध्यक्ष, धर्माचार्य प्रकोष्ठ, अखिल भारतीय हिन्दू महासभा तथा महाराष्ट्र प्रदेश प्रमुख, अखिल भारतीय सन्त समिति, परमश्रद्धेय श्रीमहन्त वेदाचार्य पीठाधीश्वर स्वामी डॉ. अनिकेत शास्त्री का अभिनन्दन किया गया।
अभिनन्दन के प्रत्युत्तर में स्वामी डॉ. अनिकेत शास्त्री ने कहा कि काशी में बाबा श्रीकाशी विश्वनाथ के दर्शन के बाद ज्ञान की प्राचीनतम परम्परा की प्रमुख संस्था सम्पूर्णानन्द संस्कृत विश्वविद्यालय में श्रीकाशीविद्वद्धर्मपरिषद् द्वारा किया गया सम्मान उनके लिए अत्यंत गौरव और हर्ष का विषय है।
उन्होंने कहा कि परिषद् का संचालन एक सिद्ध संत के नाम पर स्थापित श्री श्री 1008 श्री मौनी बाबा चैरिटेबल ट्रस्ट न्यास के माध्यम से होना अपने आप में गौरव की बात है। उनके अनुसार यह अभिनन्दन केवल उनका व्यक्तिगत सम्मान नहीं, बल्कि संत परम्परा और सनातन धर्म की सेवा में जुटे अनेक लोगों एवं परम्पराओं का सम्मान है।
स्वामी डॉ. अनिकेत शास्त्री ने कहा कि परिषद् ने अभिनन्दन के माध्यम से सनातन धर्म, संस्कृति और परम्परा के संरक्षण के लिए कार्य करने वालों को नई ऊर्जा और शक्ति प्रदान की है। उन्होंने धार्मिक एवं सांस्कृतिक आयोजनों के संचालन में शास्त्रीय मर्यादाओं के पालन की आवश्यकता पर भी बल दिया।
उन्होंने कहा कि नासिक-त्र्यंबकेश्वर जैसे कुंभ क्षेत्रों के आयोजन और व्यवस्थापन में शास्त्रीय एवं धर्मसम्मत पद्धति को और अधिक महत्व दिए जाने की आवश्यकता है। ऐसे में श्रीकाशीविद्वद्धर्मपरिषद् के विद्वान सरकार और प्रशासन को शास्त्रीय परम्पराओं के अनुरूप आवश्यक दिशा-निर्देश देने की दिशा में महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकते हैं।
सम्पूर्णानन्द संस्कृत विश्वविद्यालय को अंतरराष्ट्रीय पहचान दिलाने पर जोर
स्वामी डॉ. अनिकेत शास्त्री ने सम्पूर्णानन्द संस्कृत विश्वविद्यालय के गौरवशाली इतिहास और संस्कृत शिक्षा में उसके योगदान का उल्लेख करते हुए कहा कि विश्व की प्राचीन एवं प्रतिष्ठित संस्कृत संस्थाओं में स्थान रखने वाले इस विश्वविद्यालय को राष्ट्रीय स्तर के साथ-साथ अंतरराष्ट्रीय संस्कृत विश्वविद्यालय के रूप में और आगे बढ़ना चाहिए।
उन्होंने कुलपति प्रो. बिहारी लाल शर्मा की कार्यदक्षता एवं सक्रियता की सराहना करते हुए विश्वास व्यक्त किया कि विश्वविद्यालय आने वाले समय में अपने संकल्प और अपेक्षित उत्कर्ष को प्राप्त करेगा।
इस अवसर पर परिषद् के कार्यकारी अध्यक्ष पं. कमलाकान्त त्रिपाठी ने स्वामी डॉ. अनिकेत शास्त्री के अभिनन्दन-पत्र का वाचन किया। उन्होंने स्वामी जी के व्यक्तित्व, कृतित्व, आध्यात्मिक साधना और विभिन्न क्षेत्रों में किए जा रहे योगदान का विस्तार से उल्लेख किया।
( यहाँ video देखें)👆कुलपति प्रो. बिहारी लाल शर्मा का भी अभिनन्दन
समारोह में सम्पूर्णानन्द संस्कृत विश्वविद्यालय के कुलपति प्रो. बिहारी लाल शर्मा का भी अभिनन्दन किया गया। अपने संबोधन में कुलपति ने परिषद् के प्रति आभार व्यक्त करते हुए कहा कि यह सम्मान विश्वविद्यालय के संवर्धन एवं उत्कर्ष के लिए नई प्रेरणा और शक्ति प्रदान करेगा।
उन्होंने कहा कि स्वामी डॉ. अनिकेत शास्त्री द्वारा विश्वविद्यालय के उत्कर्ष के लिए जिस संकल्प का समर्थन किया गया तथा श्रीकाशीविद्वद्धर्मपरिषद् के प्रस्ताव का जिस प्रकार अनुमोदन किया गया, वह विश्वविद्यालय परिवार के लिए प्रसन्नता और गौरव का विषय है।
कुलपति के अभिनन्दन-पत्र का वाचन प्रो. धर्मदत्त चतुर्वेदी ने किया। उन्होंने कुलपति के व्यक्तित्व, विद्वत्ता, प्रशासनिक दक्षता और विश्वविद्यालय के विकास के प्रति उनके समर्पण पर प्रकाश डाला।
परिषद् को काशी की अन्य धर्मपरिषदों का पूरक बताया
कार्यक्रम की अध्यक्षता करते हुए श्रीकाशीविद्वद्धर्मपरिषद् के अध्यक्ष पं. छोटेलाल त्रिपाठी ने परिषद् के उद्देश्यों, कार्यों और भावी योजनाओं पर विस्तार से प्रकाश डाला। उन्होंने कहा कि परिषद् सनातन धर्म, वैदिक परम्परा, शास्त्रीय ज्ञान और सांस्कृतिक मूल्यों के संरक्षण-संवर्धन के लिए व्यापक स्तर पर कार्य करने के संकल्प के साथ आगे बढ़ रही है।
उन्होंने कहा कि परिषद् का उद्देश्य केवल धार्मिक आयोजनों तक सीमित नहीं है, बल्कि शास्त्रीय ज्ञान को समाज के व्यापक वर्ग तक पहुंचाना और धर्म-संस्कृति से जुड़े विषयों पर विद्वत्पूर्ण समाधान उपलब्ध कराना भी है।
‘गुरुकुल से गाँव तक, शास्त्र से समाधान तक’ का संकल्प
कार्यक्रम की प्रस्तावना रखते हुए श्री श्री 1008 श्री मौनी बाबा चैरिटेबल ट्रस्ट न्यास के मुख्य न्यासी एवं गुरुकुल एवं मन्दिर सेवा योजना प्रमुख, जम्मू-कश्मीर प्रान्त, डॉ. अभिषेक कुमार उपाध्याय ने परिषद् की स्थापना के उद्देश्य और कार्यदृष्टि पर विस्तार से प्रकाश डाला।
उन्होंने कहा कि काशी में पहले से अनेक विद्वत् एवं धर्मपरिषदें कार्यरत हैं, ऐसे में नई परिषद् की आवश्यकता का उद्देश्य किसी प्रकार की प्रतिस्पर्धा नहीं है। श्रीकाशीविद्वद्धर्मपरिषद् काशी की विद्यमान विद्वत् एवं धर्मपरिषदों की पूरक शक्ति के रूप में कार्य करेगी।
उन्होंने परिषद् के मूल ध्येय “गुरुकुल से गाँव तक, शास्त्र से समाधान तक” को रेखांकित किया। उन्होंने बताया कि परिषद् विशेष रूप से ऐसे क्षेत्रों में भी कार्य करना चाहती है जहां मंदिरों, संस्कृत शिक्षा और वैदिक परम्पराओं को पुनर्जीवित करने की आवश्यकता है।
डॉ. अभिषेक कुमार उपाध्याय ने जम्मू-कश्मीर जैसे सीमांत क्षेत्रों में सूने पड़े मंदिरों में अर्चक प्रशिक्षण, नित्य पूजा की पुनर्स्थापना तथा धर्म-संस्कृति से जुड़े कार्यों को गति देने की आवश्यकता पर बल दिया।
अखिल भारत हिन्दू महासभा के राष्ट्रीय अध्यक्ष ने जताया आभार
कार्यक्रम में अखिल भारत हिन्दू महासभा के राष्ट्रीय अध्यक्ष डॉ. मुन्ना कुमार शर्मा ने भी सहभागिता की। उन्होंने स्वामी डॉ. अनिकेत शास्त्री के अभिनन्दन और परिषद् द्वारा आयोजित इस गरिमामय कार्यक्रम की सराहना की तथा आयोजन के लिए परिषद् के प्रति आभार व्यक्त किया।
काशी के विद्वानों का भी हुआ सम्मान
अभिनन्दन समारोह के दौरान काशी के अनेक मूर्धन्य विद्वानों, आचार्यों और गणमान्यजनों का पूजन, अभिनन्दन एवं सम्मान किया गया। इससे कार्यक्रम में विद्वत् परम्परा और गुरु-शिष्य संस्कृति के प्रति सम्मान का भाव और अधिक स्पष्ट हुआ।
कार्यक्रम का गरिमापूर्ण संचालन परिषद् के प्रवक्ता पं. विजय शर्मा ने किया। अंत में परिषद् के कार्यालय मंत्री पं. दुर्गेश पाठक ने उपस्थित संत-महात्माओं, विद्वानों, अतिथियों एवं गणमान्यजनों के प्रति आभार व्यक्त करते हुए धन्यवाद ज्ञापित किया।
इस अवसर पर प्रो. सुधाकर मिश्र, प्रो. रामप्रिय पाण्डेय, डॉ. उमंग नाथ शर्मा, प्रो. महेन्द्र नाथ पाण्डेय, प्रो. दिनेश कुमार गर्ग सहित शताधिक विद्वान, आचार्य एवं गणमान्यजन उपस्थित रहे।
सम्पूर्ण आयोजन में वैदिक मंत्रोच्चार, धार्मिक अनुष्ठान, विद्वत् विमर्श और सम्मान समारोह के माध्यम से सनातन धर्म, वैदिक परम्परा, संस्कृत शिक्षा तथा भारतीय संस्कृति के संरक्षण-संवर्धन का संदेश दिया गया। आयोजन में परिषद् की भावी कार्यदिशा को लेकर भी व्यापक स्तर पर विचार सामने आए।























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