बुनकरों ने 400 रुपये फ्लैट रेट और 75 किलोवाट तक लोड की मांग को लेकर पारित किया प्रस्ताव | AARCC LIVE NEWS VARANASI
बिजली दर में राहत और एरियर समाप्त करने की मांग, सरकार को जल्द शासनादेश जारी करने की अपील
रिपोर्ट/आलोक चतुर्वेदी / सचिन देव
वाराणसी। काजीसडुल्लापुरा स्थित गुलिस्ता स्कूल में रविवार को उत्तर प्रदेश के विभिन्न जिलों से आए बुनकर प्रतिनिधियों की महत्वपूर्ण बैठक आयोजित हुई। बुनकर उद्योग मंडल के तत्वावधान में हुई बैठक में बुनकरों की बिजली की फ्लैट रेट दर, कनेक्शन लोड और बुनकरों के पलायन समेत कई मुद्दों पर चर्चा की गई। बैठक में मांगों को लेकर प्रस्ताव तैयार कर सर्वसम्मति से पारित किया गया।
बैठक में बुनकर प्रतिनिधियों ने कहा कि बिजली की फ्लैट रेट दर कम करने और भार वृद्धि के मुद्दे पर सरकार के साथ लखनऊ, कानपुर और वाराणसी में कई दौर की बैठकें हो चुकी हैं। मंत्री राकेश सचान द्वारा बुनकर बहुल जिलों में जाकर बुनकरों से संवाद कर उनकी समस्याएं और सुझाव भी लिए गए थे। इससे बुनकरों को उम्मीद थी कि वर्तमान फ्लैट रेट में बड़ी राहत मिलेगी, लेकिन अभी तक इस दिशा में कोई ठोस निर्णय नहीं हो सका है।
400 रुपये प्रति किलोवाट फ्लैट रेट की मांग
बैठक में पारित प्रस्ताव में बुनकरों के लिए बिजली की फ्लैट रेट दर सभी करों सहित 400 रुपये प्रति किलोवाट करने की मांग की गई। इसके साथ ही बुनकरों पर लंबित एरियर को समाप्त करने और 5 किलोवाट से अधिक भार को बढ़ाकर अधिकतम 75 किलोवाट तक करने की मांग रखी गई। प्रतिनिधियों ने कहा कि 75 किलोवाट तक लोड बढ़ाने पर बुनकरों को कोई आपत्ति नहीं है।
बिजली महंगी होने से बढ़ रहा पलायन
बुनकर प्रतिनिधियों ने कहा कि बिजली की अधिक लागत और रोजगार में कमी का सीधा असर बुनकर उद्योग पर पड़ रहा है। आर्थिक दबाव के चलते बड़ी संख्या में बुनकर दूसरे प्रदेशों में रोजगार की तलाश में पलायन कर रहे हैं। कई बुनकर अपनी लाखों रुपये की पावरलूम मशीनें भी कम कीमत पर बेचने को मजबूर हैं।
प्रतिनिधियों ने कहा कि यदि सरकार 400 रुपये प्रति किलोवाट की फ्लैट रेट और 75 किलोवाट तक लोड की व्यवस्था को जल्द लागू करती है तो बुनकर उद्योग को राहत मिलेगी और पलायन रोकने में मदद मिलेगी।
बुनकारी को बताया रोजगार का बड़ा आधार
वक्ताओं ने कहा कि कृषि के बाद बुनकारी प्रदेश में रोजगार उपलब्ध कराने वाले प्रमुख क्षेत्रों में शामिल है। इस उद्योग से जुड़े कारोबार से सरकार को राजस्व भी प्राप्त होता है। उन्होंने कहा कि बिजली की दर में राहत मिलने से बुनकरों के साथ-साथ इससे जुड़े अन्य कारोबारियों को भी लाभ होगा।
बैठक में बुनकारी को हिंदू-मुस्लिम एकता का प्रतीक बताते हुए वक्ताओं ने कहा कि इस उद्योग में दोनों समुदायों की महत्वपूर्ण भागीदारी है। ताना और बाना दोनों समुदायों की साझी मेहनत का प्रतीक हैं और बुनकारी सामाजिक एकता का संदेश देती है।
मांग पूरी नहीं हुई तो पावरलूम बंद करने की चेतावनी
बुनकर प्रतिनिधियों ने सरकार से मांग की कि प्रस्ताव को जल्द लागू करते हुए नया शासनादेश जारी किया जाए। उन्होंने कहा कि यदि मांगों पर शीघ्र निर्णय नहीं लिया गया तो बुनकर पावरलूम बंद करने जैसे कदम उठाने के लिए मजबूर हो सकते हैं।
बैठक में उत्तर प्रदेश बुनकर सभा के अध्यक्ष हाजी इफ्तेखार अहमद, मऊआइमा के चेयरमैन शोएब अंसारी, बाराबंकी के तफज्जुल हुसैन, गोरखपुर के हाजी अब्दुल्लाह, मेरठ के हाजी रईसुद्दीन, खलीलाबाद के इमामुद्दीन, कानपुर के लतीफ अंसारी, मऊ के एनुअल मुजफ्फर, आजमगढ़ के शफीक अहमद और मुबारकपुर के गुफरान अंसारी सहित विभिन्न जिलों से आए बुनकर प्रतिनिधि मौजूद रहे।
वाराणसी में कार्यक्रम की मेजबानी बुनकर बिरादराना तंजीम के सरदारों एवं महतो तथा हाजी इश्तियाक अहमद, हाजी मुख्तार अहमद, मनोज जायसवाल, स्वालेह अंसारी, जमालुद्दीन, शकील अहमद, शैलेश सिंह, जकी मुख्तार, राकेश कांत, पार्षद गुलशन अली, बिस्मिल्ला अंसारी, तनवीर अहमद, एखलाख अंसारी, इदरीस अंसारी, बिलाल और अतहर सहित अन्य लोगों ने की।
कार्यक्रम की अध्यक्षता बुनकर बिरादराना तंजीम के सरदार हाफिज मोइनुद्दीन ने की। संचालन बुनकर उद्योग मंडल के महासचिव जुबैर आदिल ने किया, जबकि अकील अंसारी ने धन्यवाद ज्ञापित किया। बैठक में आए बुनकर प्रतिनिधियों का स्वागत पार्षद हाजी ओकास अंसारी ने किया।


















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