गुरु पूर्णिमा पर मानव धर्म मंदिर में उमड़ा श्रद्धा का सैलाब, 2000 श्रद्धालु जुटे | AARCC LIVE NEWS VARANASI
मानव धर्म मंदिर में श्रद्धा और उल्लास के साथ मनाया गया गुरु पूर्णिमा महोत्सव, 2000 श्रद्धालुओं ने लिया सत्संग का लाभ
महात्मा सुजाता बाई जी ने कहा- तत्वदर्शी सद्गुरु के बिना ज्ञान अधूरा, गुरु ही कराते हैं परम तत्व का दर्शन
रिपोर्ट:-आलोक चतुर्वेदी/सचिनदेव
वाराणसी। खनाव,अखरी बाईपास स्थित मानव धर्म मंदिर आश्रम में बुधवार को मानव उत्थान सेवा समिति,शाखा वाराणसी की ओर से गुरु पूर्णिमा महोत्सव श्रद्धा, भक्ति और उत्साह के साथ मनाया गया। गुरु पूजा महोत्सव में बड़ी संख्या में श्रद्धालु शामिल हुए। कार्यक्रम में करीब 2000 गुरु भाई-बहनों की उपस्थिति रही। सुबह 10 बजे से दोपहर 3 बजे तक चले इस आयोजन में सत्संग, आध्यात्मिक विचार, सांस्कृतिक प्रस्तुतियों और भंडारा प्रसाद वितरण के माध्यम से गुरु की महिमा और मानव जीवन में सद्गुरु की आवश्यकता पर प्रकाश डाला गया।
कार्यक्रम में सद्गुरुदेव सतपाल जी महाराज की आत्मानुभवी शिष्या एवं पूर्वांचल प्रभारी महात्मा सुजाता बाई जी तथा महात्मा महादेवी बाई जी ने श्रद्धालुओं को संबोधित किया। दोनों संतों ने अपने सत्संग विचारों में गुरु की महिमा, आत्मज्ञान और मानव जीवन के वास्तविक उद्देश्य को सरल शब्दों में समझाया।
सद्गुरु अज्ञान के अंधकार को दूर कर परम प्रकाश का मार्ग दिखाते हैं
महात्मा महादेवी बाई जी ने कहा कि हमारे धर्मग्रंथों में गुरु की महिमा का विस्तार से वर्णन किया गया है। ‘गु’ का अर्थ अंधकार और ‘रु’ का अर्थ प्रकाश बताया गया है। सद्गुरु मनुष्य के भीतर व्याप्त अज्ञान, माया और मोह के अंधकार को दूर कर उसके हृदय में परम प्रकाश का मार्ग प्रशस्त करते हैं। उन्होंने कहा कि केवल बाहरी धार्मिक कर्मकांड ही पर्याप्त नहीं हैं, बल्कि मनुष्य को अपने भीतर स्थित परम तत्व के ज्ञान की आवश्यकता है।
उन्होंने गुरु की महिमा को स्पष्ट करते हुए कहा कि सद्गुरु ही मानव जीवन को सही दिशा प्रदान करते हैं और व्यक्ति को सत्य के मार्ग पर आगे बढ़ने की प्रेरणा देते हैं।
गुरु ही गोविंद का दर्शन कराने वाले हैं : महात्मा सुजाता बाई जी
सत्संग को संबोधित करते हुए महात्मा सुजाता बाई जी ने कहा कि प्रत्येक मनुष्य के भीतर परमात्मा की शक्ति विद्यमान है। इस परम शक्ति का वास्तविक ज्ञान समय के सद्गुरु ही कराते हैं। उन्होंने कहा कि मानव जीवन में सच्चे सद्गुरु का होना अत्यंत आवश्यक है, क्योंकि सद्गुरु ही मनुष्य को संसार के मोह-माया से ऊपर उठकर अपने वास्तविक स्वरूप को जानने का मार्ग दिखाते हैं।
उन्होंने कहा कि गुरु और गोविंद की महिमा भारतीय आध्यात्मिक परंपरा में सदैव सर्वोच्च रही है। गुरु ही साधक को उस परम तत्व का ज्ञान कराते हैं, जो प्रत्येक मनुष्य के हृदय में विद्यमान है। इसी कारण धर्मग्रंथों और संत परंपरा में गुरु की महिमा का विशेष वर्णन मिलता है।
महात्मा सुजाता बाई जी ने उपस्थित श्रद्धालुओं से आह्वान किया कि प्रत्येक मनुष्य को अपने जीवन में उस परम तत्व के ज्ञान की खोज करनी चाहिए। उन्होंने कहा कि जब तक मनुष्य अपने हृदय में परम सत्य का अनुभव नहीं कर लेता, तब तक उसे सच्चे सद्गुरु की खोज जारी रखनी चाहिए। उन्होंने कहा कि मानव उत्थान सेवा समिति का उद्देश्य भी मानव को आत्मज्ञान और आध्यात्मिक चेतना के मार्ग से जोड़ना है।
उन्होंने रामायण में वर्णित ‘परम प्रकाश’ का उल्लेख करते हुए कहा कि वह परम प्रकाश प्रत्येक मनुष्य के भीतर विद्यमान है। उस परम तत्व को जानना और उसका अनुभव करना ही मानव जीवन के वास्तविक कल्याण का मार्ग है।
युवाओं ने सांस्कृतिक प्रस्तुतियों से बांधा समां
गुरु पूर्णिमा महोत्सव के दौरान आध्यात्मिक सत्संग के साथ सांस्कृतिक कार्यक्रम भी आयोजित किया गया। अनन्या पांडे एवं अन्य युवा प्रतिभागियों ने सांस्कृतिक प्रस्तुतियां देकर कार्यक्रम में उत्साह और उमंग का वातावरण बना दिया। श्रद्धालुओं ने प्रस्तुतियों का आनंद लिया और कलाकारों का उत्साहवर्धन किया।
कार्यक्रम के समापन पर भंडारा प्रसाद का आयोजन किया गया, जिसमें बड़ी संख्या में श्रद्धालुओं ने प्रसाद ग्रहण किया। पूरे आयोजन के दौरान आश्रम परिसर में आध्यात्मिक और भक्तिमय वातावरण बना रहा।
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आयोजन को सफल बनाने में कार्यकर्ताओं का योगदान
गुरु पूर्णिमा महोत्सव को सफल बनाने में मानव उत्थान सेवा समिति के जिला प्रधान सुरेंदर नाथ, जिला सचिव गुलजारी लाल, भूतपूर्व प्रधान विजय प्रकाश पाठक, पूर्व एस.सी. आर.सी. यादव, शाखा आश्रम विभाग तथा मानव सेवा दल के जिला प्रमुख छोटेलाल यादव सहित चंद्रशेखर, हरिकेश, आशा, वंदना एवं अन्य कार्यकर्ताओं का महत्वपूर्ण योगदान रहा।
मीडिया प्रभारी पूनम और विनोद के साथ युवा कार्यकर्ताओं नमन, आदर्श, अजय, आशुतोष, पंकज, दीपक, प्रज्ञा, आरती सहित अन्य स्वयंसेवकों ने भी आयोजन की व्यवस्थाओं में सक्रिय भूमिका निभाई। आयोजकों ने सभी सहयोगियों और श्रद्धालुओं के प्रति आभार व्यक्त किया।
गुरु पूर्णिमा के इस आयोजन ने श्रद्धालुओं को गुरु की महिमा, आत्मज्ञान और मानव जीवन के उद्देश्य पर चिंतन करने का अवसर प्रदान किया। सत्संग और आध्यात्मिक संदेशों के बीच आयोजित यह महोत्सव श्रद्धा, सेवा और मानव उत्थान के संदेश के साथ संपन्न हुआ।










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