चन्द्रमा सिंह रचनावली खंड-2 का लोकार्पण, साहित्यकारों ने उनके साहित्यिक योगदान को किया याद | AARCC LIVE NEWS VARANASI
चन्द्रमा सिंह रचनावली खंड-2 का लोकार्पण, साहित्यकारों ने याद किया साहित्यिक योगदान
राजेश्वरी महिला स्नातकोत्तर महाविद्यालय में चन्द्रमा सिंह की 93वीं जयंती पर परिचर्चा, काव्य गोष्ठी और सम्मान समारोह आयोजित
वाराणसी, 30 जुलाई। राजेश्वरी एजुकेशनल एण्ड चैरिटेबल ट्रस्ट के तत्वावधान में गुरुवार को राजेश्वरी महिला स्नातकोत्तर महाविद्यालय, हरहुआ में सुप्रसिद्ध साहित्यकार चन्द्रमा सिंह की 93वीं जयंती समारोहपूर्वक मनाई गई। साहित्य और समाज के क्षेत्र में उनके योगदान को याद करते हुए आयोजित इस कार्यक्रम में परिचर्चा, काव्य गोष्ठी एवं सम्मान समारोह का आयोजन किया गया। कार्यक्रम का प्रमुख आकर्षण साहित्यकार डॉ. राघवेन्द्र नारायण सिंह द्वारा संपादित ‘चन्द्रमा सिंह रचनावली’ खंड-2 का लोकार्पण रहा।
कार्यक्रम का शुभारंभ अतिथियों द्वारा मां सरस्वती एवं साहित्यकार चन्द्रमा सिंह के चित्र पर माल्यार्पण और दीप प्रज्ज्वलन के साथ हुआ। समारोह की अध्यक्षता सुप्रसिद्ध इतिहासकार राघवशरण शर्मा ने की। तिब्बतन इंस्टीट्यूट के प्रोफेसर उमेश प्रसाद सिंह मुख्य अतिथि रहे। कार्यक्रम में राजकुमार सिंह, साहित्यकार डॉ. रामसुधार सिंह विशिष्ट अतिथि तथा प्रोफेसर इंदीवर मुख्य वक्ता के रूप में उपस्थित रहे।
चन्द्रमा सिंह का साहित्य आम आदमी के सरोकारों से जुड़ा रहा
कार्यक्रम को संबोधित करते हुए राजेश्वरी एजुकेशनल एण्ड चैरिटेबल ट्रस्ट के चेयरमैन एवं वरिष्ठ साहित्यकार डॉ. राघवेन्द्र नारायण सिंह ने सभी अतिथियों का स्वागत किया। उन्होंने कहा कि चन्द्रमा सिंह का व्यक्तित्व बहुआयामी था। उन्होंने सत्तर और अस्सी के दशक में आम आदमी के जीवन, संघर्ष और सरोकारों को केंद्र में रखकर साहित्य सृजन किया। साहित्य के साथ-साथ वे शिक्षा और समाजसेवा के क्षेत्र में भी सक्रिय रहे।
मुख्य वक्ता प्रोफेसर इंदीवर ने चन्द्रमा सिंह को हिन्दी साहित्य का ज्वलंत नक्षत्र बताते हुए उनके काव्यधर्म और चिंतन पर विस्तार से प्रकाश डाला। उन्होंने कहा कि चन्द्रमा सिंह की रचनाओं में समाज और व्यक्ति के जीवन से जुड़े विभिन्न पक्षों की प्रभावी अभिव्यक्ति दिखाई देती है।
साहित्यकार डॉ. रामसुधार सिंह ने चन्द्रमा सिंह को जमीनी सरोकारों से जुड़ा साहित्यकार बताते हुए कहा कि उनकी कविताओं में आम आदमी के संघर्ष और जीवन की वास्तविकता दिखाई देती है। राजकुमार सिंह ने उन्हें प्रमुख जनवादी साहित्यकार के रूप में याद किया। वहीं मुख्य अतिथि प्रोफेसर उमेश प्रसाद सिंह ने चन्द्रमा सिंह की रचनाओं में निहित जीवन-मूल्यों की चर्चा करते हुए उनके साहित्य पर गंभीर और व्यापक शोध की आवश्यकता पर बल दिया।
नौ लोगों को प्रदान किया गया चन्द्रमा सिंह स्मृति सम्मान-2026
समारोह के दौरान शिक्षा, उच्च शिक्षा, प्राथमिक शिक्षा, महिला सशक्तिकरण, ग्राम विकास, सामाजिक सेवा, विधिक सेवा, पत्रकारिता और विधि के क्षेत्र में उल्लेखनीय योगदान देने वाले नौ लोगों को ‘चन्द्रमा सिंह स्मृति सम्मान-2026’ से सम्मानित किया गया।
शिक्षा के क्षेत्र में योगदान के लिए जय प्रकाश दूबे को ‘शिक्षक शिरोमणि सम्मान’, उच्च शिक्षा के क्षेत्र में उत्कृष्ट सेवा के लिए डॉ. भवनाथ सिंह को ‘विद्यारत्न सम्मान’, प्राथमिक शिक्षा संवर्ग में उत्कृष्ट सेवाओं के लिए जगदीश दूबे को ‘गुरु गौरव सम्मान’ प्रदान किया गया।
इसी क्रम में महिला सशक्तिकरण के क्षेत्र में विशिष्ट योगदान के लिए अलका यादव को ‘महिला शक्ति गौरव सम्मान’, ग्राम विकास में उत्कृष्ट योगदान के लिए सोनू प्रसाद को ‘ग्राम विकास गौरव सम्मान’, सामाजिक सेवा के लिए दीपक चौहान को ‘जनसेवा गौरव सम्मान’ और विधिक सेवा क्षेत्र में योगदान के लिए आशुतोष नारायण शर्मा को ‘न्याय एवं विधि गौरव सम्मान’ प्रदान किया गया।
मीडिया क्षेत्र में अनवरत सेवाओं के लिए राजकुमार सिंह को ‘पत्रकारिता गौरव सम्मान’ तथा विधिक उत्कृष्टता के क्षेत्र में योगदान के लिए रजनीकान्त श्रीवास्तव को ‘विधि विभूषण सम्मान’ से सम्मानित किया गया। सभी सम्मानित व्यक्तियों को स्मृति-चिह्न, प्रशस्ति-पत्र एवं अंगवस्त्रम प्रदान कर उनके योगदान की सराहना की गई।
काव्य गोष्ठी में कवियों ने प्रस्तुत की रचनाएं
कार्यक्रम के दूसरे सत्र में काव्य गोष्ठी का आयोजन किया गया। इसकी अध्यक्षता प्रोफेसर इशरत जहां ने की। काव्य गोष्ठी में डॉ. नसीमा निशा, डॉ. महेन्द्र तिवारी ‘अलंकार’, डॉ. संगीता श्रीवास्तव ‘सहर’, डॉ. प्रताप शंकर दूबे, डॉ. करुणा सिंह, ऋतु दीक्षित, मधूलिका राय ‘मधु’, मु. आमिर, एखलाक भारतीय, आलोक सिंह, कुमार महेन्द्र और अनु मिश्रा सहित अन्य कवियों ने अपनी रचनाओं का काव्य पाठ किया। कवियों की प्रस्तुतियों ने समारोह को साहित्यिक और भावपूर्ण वातावरण से भर दिया।
चन्द्रमा सिंह को दी गई भावभीनी श्रद्धांजलि
कार्यक्रम के अंत में ट्रस्ट चेयरमैन डॉ. राघवेन्द्र नारायण सिंह ने सभी अतिथियों, साहित्यकारों, कवियों, सम्मानित व्यक्तियों और उपस्थित लोगों के प्रति आभार व्यक्त किया।
कार्यक्रम के संयोजक एवं उपनिदेशक अंशुमान सिंह, कौशलेन्द्र नारायण सिंह, विजयेन्द्र नारायण सिंह, डॉ. कुमुद सिंह, डॉ. नृपेन्द्र नारायण सिंह, डॉ. महेन्द्र प्रताप सिंह, रतन पाण्डेय, रमेश तिवारी और हृदयनारायण दूबे सहित महाविद्यालय के शिक्षकों एवं छात्राओं ने साहित्यकार चन्द्रमा सिंह के चित्र पर माल्यार्पण कर उन्हें भावभीनी श्रद्धांजलि अर्पित की।
समारोह में वक्ताओं ने कहा कि चन्द्रमा सिंह का साहित्य आज भी सामाजिक सरोकारों, आम आदमी के संघर्ष और जीवन-मूल्यों के प्रति अपनी प्रतिबद्धता के कारण प्रासंगिक है। ‘चन्द्रमा सिंह रचनावली’ खंड-2 का प्रकाशन उनके साहित्यिक अवदान को संरक्षित करने और नई पीढ़ी तक पहुंचाने की दिशा में महत्वपूर्ण प्रयास माना गया।











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