संतों को विदेशों में भी करना चाहिए सनातन धर्म का प्रचार : योगी रामानंद दास महाराज | AARCC LIVE NEWS VARANASI
रिपोर्ट:-आलोक चतुर्वेदी
चौबेपुर/वाराणसी। धौरहरा हरिहरपुर गांव में आयोजित श्री शतचंडी महायज्ञ के तीसरे दिन शुक्रवार को श्रद्धालुओं ने वैदिक मंत्रोच्चार के बीच यज्ञशाला में आहुतियां अर्पित कर विश्व कल्याण की कामना की। महायज्ञ परिसर में बड़ी संख्या में श्रद्धालुओं की उपस्थिति रही।
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इस अवसर पर श्रद्धालुओं को संबोधित करते हुए योगी रामानंद दास महाराज ने कहा कि प्राचीन काल में भारत के साधु-संतों और ऋषि-मुनियों ने सनातन संस्कृति के प्रचार-प्रसार के लिए विश्व के विभिन्न देशों का भ्रमण किया था। उन्होंने कहा कि अगस्त्य ऋषि ने ऑस्ट्रेलिया तथा कंबू ऋषि ने कंबोडिया में धर्म का प्रचार किया। वहीं, भगवान श्रीकृष्ण के पुत्र सांब ने भी सीरिया सहित अनेक क्षेत्रों में सनातन संस्कृति का संदेश पहुंचाया था।
उन्होंने कहा कि वर्तमान समय में भी संतों को देश के साथ-साथ विदेशों में जाकर सनातन धर्म और भारतीय संस्कृति का व्यापक प्रचार-प्रसार करना चाहिए। उन्होंने चिंता जताते हुए कहा कि समय के साथ सनातन समाज में समुद्र यात्रा न करने जैसी मानसिकता विकसित हो गई, जिसके कारण धर्म के वैश्विक विस्तार की परंपरा प्रभावित हुई। उन्होंने संत समाज से इस दिशा में पुनः सक्रिय होकर सनातन संस्कृति के प्रचार के लिए आगे आने का आह्वान किया।
महायज्ञ के दौरान श्रद्धालुओं ने धार्मिक अनुष्ठानों में बढ़-चढ़कर भाग लिया। कार्यक्रम में अरविंद सिंह, सुशील सिंह रघुवंशी, संजय रघुवंशी, सुदर्शन सिंह, प्रवेश सिंह, बालकिशन यादव सहित अनेक श्रद्धालु उपस्थित रहे।









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