राम जन्मभूमि मंदिर की प्राण प्रतिष्ठा में आध्यात्मिक अनियमितताओं की जांच की मांग, पांच धार्मिक पदाधिकारियों को बताया जिम्मेदार | AARCC LIVE NEWS VARANASI
रिपोर्ट:- आलोक चतुर्वेदी
वाराणसी। डॉ. सुनील ने रविवार को आयोजित एक प्रेसवार्ता में श्रीराम जन्मभूमि मंदिर की प्राण प्रतिष्ठा से जुड़े कथित आध्यात्मिक अनियमितताओं के संबंध में विस्तृत जानकारी साझा की। उन्होंने कहा कि यह विषय आर्थिक या प्रशासनिक नहीं, बल्कि आध्यात्मिक दृष्टि से अत्यंत गंभीर है और इसकी निष्पक्ष जांच कर जिम्मेदार व्यक्तियों की जवाबदेही तय की जानी चाहिए।
उन्होंने कहा कि जारी प्रेस विज्ञप्ति के अनुसार मंदिर की प्राण प्रतिष्ठा एवं पूजन पद्धति में हुई कथित आध्यात्मिक त्रुटियों के कारण समाज और श्रद्धालुओं पर प्रतिकूल प्रभाव पड़ रहा है। उनके अनुसार यह विषय धन या प्रशासनिक अनियमितता नहीं, बल्कि "मन और आध्यात्मिक दिशा" से जुड़ा गंभीर विषय है।
प्रेसवार्ता में बताया गया कि भारतीय आध्यात्मिक परंपरा के अनुसार व्यक्ति के तन, मन और आत्मा में मन की भूमिका सर्वोपरि होती है। यदि धार्मिक संस्कार एवं अनुष्ठान दोषपूर्ण तरीके से संपन्न हों तो उसका प्रभाव व्यक्ति और समाज दोनों पर पड़ सकता है। इसमें आरोप लगाया गया कि प्राण प्रतिष्ठा के दौरान कथित रूप से राहु, केतु तथा शुक्राचार्य से संबंधित तत्वों को शामिल किए जाने के कारण नकारात्मक ऊर्जा का संचार हुआ, जिससे भविष्य में भी प्रतिकूल प्रभाव पड़ने की आशंका है।
प्रेस विज्ञप्ति में महाभारत और अन्य धार्मिक संदर्भों का उल्लेख करते हुए कहा गया है कि धर्म के मार्गदर्शन की जिम्मेदारी गुरुजनों और आचार्यों की होती है। यदि मार्गदर्शन में त्रुटि हो तो उसके दुष्परिणाम समाज को भुगतने पड़ते हैं। साथ ही यह भी दावा किया गया है कि वर्तमान समय में आध्यात्मिक चेतना के अपेक्षित स्तर पर विकसित न होने का एक कारण धार्मिक नेतृत्व की कथित दिशात्मक त्रुटियां हैं।
प्रेसवार्ता में इस पूरे प्रकरण की जिम्मेदारी तय करते हुए श्रीराम जन्मभूमि मंदिर की प्राण प्रतिष्ठा से जुड़े प्रधान आचार्य सहित पांच धार्मिक पदाधिकारियों को कथित रूप से जिम्मेदार ठहराते हुए उनके विरुद्ध आध्यात्मिक स्तर पर जांच एवं उत्तरदायित्व तय किए जाने की मांग की गई। इसमें रामनरेशाचार्य (रामानंद संप्रदाय प्रमुख), गणेशानंद (ऋषिकेश स्थित गोवर्धन पीठाधीश्वर), भारती तीर्थ (श्रृंगेरी शारदा पीठाधीश्वर) तथा आरएसएस के बौद्धिक प्रमुख सुनील आंबेकर (विज्ञप्ति में सुनीलभाई मेहता अंकित) का भी उल्लेख किया गया।
[ वीडियो देखें ]उन्होंने कहा कि यदि समय रहते कथित आध्यात्मिक त्रुटियों का सुधार नहीं किया गया तो भविष्य में समाज को और गंभीर परिस्थितियों का सामना करना पड़ सकता है।
(नोट: यह समाचार डॉ. सुनील द्वारा आयोजित प्रेसवार्ता एवं जारी प्रेस विज्ञप्ति में किए गए दावों पर आधारित है। इसमें लगाए गए आरोपों की स्वतंत्र पुष्टि नहीं हुई है तथा संबंधित पक्षों का पक्ष प्राप्त नहीं हो सका है।)







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