बलिदान दिवस विशेष: डॉ. श्यामा प्रसाद मुखर्जी का राष्ट्रवाद, अनुच्छेद 370 और अखंड भारत का संकल्प | AARCC LIVE NEWS VARANASI
बलिदान दिवस पर याद किए गए डॉ. श्यामा प्रसाद मुखर्जी, राष्ट्रवाद और अखंड भारत के प्रतीक के रूप में दी गई श्रद्धांजलि
वाराणसी, 23 जून। भारतीय जनसंघ के संस्थापक, प्रखर शिक्षाविद् और राष्ट्रवादी चिंतक डॉ. श्यामा प्रसाद मुखर्जी की पुण्यतिथि पर मंगलवार को उन्हें भावभीनी श्रद्धांजलि अर्पित की गई। देशभर में 23 जून को ‘बलिदान दिवस’ के रूप में मनाया जाता है। इस अवसर पर विभिन्न सामाजिक, शैक्षणिक एवं राजनीतिक संगठनों ने उनके राष्ट्र निर्माण में योगदान को स्मरण करते हुए उन्हें अखंड भारत, सांस्कृतिक चेतना और राष्ट्रीय एकता का अमर पुरोधा बताया।
वक्ताओं ने कहा कि डॉ. मुखर्जी ने अपने संपूर्ण जीवन को राष्ट्रहित के लिए समर्पित किया। वे शिक्षा के भारतीयकरण, मातृभाषा के सम्मान तथा राष्ट्रीय चेतना के प्रबल समर्थक थे। मात्र 33 वर्ष की आयु में कलकत्ता विश्वविद्यालय के सबसे युवा कुलपति बनकर उन्होंने अपनी असाधारण प्रतिभा का परिचय दिया। बाद में स्वतंत्र भारत की पहली सरकार में उद्योग एवं आपूर्ति मंत्री के रूप में भी महत्वपूर्ण भूमिका निभाई।
कार्यक्रम में वक्ताओं ने कहा कि सिद्धांतों के प्रति उनकी प्रतिबद्धता इतनी मजबूत थी कि उन्होंने राष्ट्रीय हितों के मुद्दों पर समझौता करने के बजाय केंद्रीय मंत्रिमंडल से इस्तीफा देना स्वीकार किया। वर्ष 1951 में उन्होंने भारतीय जनसंघ की स्थापना कर भारतीय राजनीति को एक नई वैचारिक दिशा प्रदान की, जो आगे चलकर भारतीय जनता पार्टी के रूप में विकसित हुई।
डॉ. मुखर्जी का सबसे चर्चित संघर्ष जम्मू-कश्मीर में लागू विशेष प्रावधानों के विरुद्ध रहा। उन्होंने “एक देश में दो विधान, दो प्रधान और दो निशान नहीं चलेंगे” का नारा देते हुए राष्ट्रीय एकता का संदेश दिया। वर्ष 1953 में जम्मू-कश्मीर में बिना परमिट प्रवेश करने के दौरान उन्हें गिरफ्तार किया गया था और 23 जून 1953 को हिरासत के दौरान उनका निधन हो गया। इसी कारण प्रतिवर्ष 23 जून को उनका बलिदान दिवस मनाया जाता है।
वक्ताओं ने कहा कि डॉ. श्यामा प्रसाद मुखर्जी का जीवन आज भी राष्ट्रवाद, सांस्कृतिक गौरव और राष्ट्रीय एकता के लिए प्रेरणा का स्रोत है। उन्होंने कहा कि भारत की एकता और अखंडता के लिए उनका योगदान सदैव स्मरणीय रहेगा तथा आने वाली पीढ़ियों को राष्ट्र सेवा के लिए प्रेरित करता रहेगा।
इस अवसर पर उपस्थित लोगों ने भारत माता के इस महान सपूत को श्रद्धासुमन अर्पित करते हुए उनके आदर्शों पर चलने का संकल्प लिया।







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