पुरुषोत्तम मास में श्रीमद्भागवत कथा का षष्ठ दिवस सम्पन्न, डॉ. अनुरंजिका चतुर्वेदी ने दिए जीवन और धर्म के गूढ़ संदेश | AARCC LIVE NEWS VARANASI
वाराणसी/रिपोर्ट-आलोक चतुर्वेदी/सचिन देव श्रीमद्भागवत कथा ज्ञान-यज्ञ के अंतर्गत संस्कृति सेवा न्यास द्वारा आयोजित कथा के षष्ठ दिवस पर मंगलवार, 26 मई 2026 को श्रद्धालुओं ने भगवान श्रीकृष्ण की लीलाओं और आध्यात्मिक संदेशों का रसपान किया। कथा व्यास डॉ. अनुरंजिका चतुर्वेदी ने अपने प्रवचन में धर्म, भक्ति, कर्म और जीवन के गहन सिद्धांतों पर प्रकाश डाला। उन्होंने कहा कि जब मनुष्य के पुण्य क्षीण होने लगते हैं और पापकर्मों का भार बढ़ जाता है, तब वह उच्च कुल और श्रेष्ठ परिवेश में जन्म लेने के बावजूद अहंकार एवं अत्याचार के मार्ग पर अग्रसर हो जाता है। ऐसे समय में परमात्मा स्वयं उसके अहंकार का विनाश करने हेतु अवतार लेते हैं। डॉ. चतुर्वेदी ने श्रीमद्भागवत में वर्णित पूतना, अघासुर, बकासुर, तृणावर्त, कालिया नाग, कंस और शिशुपाल जैसे चरित्रों का उदाहरण देते हुए बताया कि भगवान अंततः अधर्म का नाश कर पीड़ितों को राहत प्रदान करते हैं। भगवान श्रीकृष्ण के जीवन चरित्र का उल्लेख करते हुए उन्होंने कहा कि श्रीकृष्ण ने जीवन में कभी पीछे मुड़कर नहीं देखा। कारागार में जन्म लेने के बाद वे निरंतर आगे बढ़ते रहे और य...