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आईजीएनसीए में ‘समर्पण’ पुस्तक पर परिचर्चा, दीनदयाल उपाध्याय के विचारों पर हुआ मंथन | AARCC LIVE NEWS VARANASI


  रिपोर्ट/आलोक चतुर्वेदी/सचिन देव. 

पं. दीनदयाल उपाध्याय के जीवन-दर्शन की समग्र व्याख्या है ‘समर्पण’ : विद्याप्रसाद मिश्र

वाराणसी, 11 जून 2026। इन्दिरा गांधी राष्ट्रीय कला केन्द्र (आईजीएनसीए), क्षेत्रीय केन्द्र, वाराणसी द्वारा पंडित दीनदयाल उपाध्याय के जीवन, विचार और राष्ट्र के प्रति उनके समर्पण पर आधारित पुस्तक ‘समर्पण’ पर ‘पुस्तक परिचर्चा एवं संवाद’ कार्यक्रम का आयोजन किया गया। कार्यक्रम में देशभर से आए विद्वानों, शिक्षाविदों, शोधार्थियों एवं सामाजिक कार्यकर्ताओं ने सहभागिता की।


कार्यक्रम के मुख्य अतिथि भारतीय ज्ञान-परम्परा के मर्मज्ञ विद्वान, ओजस्वी वक्ता एवं सामाजिक चिन्तक श्री विद्याप्रसाद मिश्र तथा अध्यक्षता राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ एवं प्रज्ञा प्रवाह के राष्ट्रीय कार्यकारी सदस्य श्री रामाशीष सिंह ने की। पुस्तक के लेखक श्री चन्दन कुमार कार्यक्रम में विशेष रूप से उपस्थित रहे।

 कार्यक्रम का शुभारम्भ पंडित दीनदयाल उपाध्याय के जीवन पर आधारित डॉक्यूमेंट्री के प्रदर्शन से हुआ। इसके पश्चात भारत माता एवं पंडित दीनदयाल उपाध्याय के चित्र पर पुष्पांजलि अर्पित कर दीप प्रज्ज्वलन किया गया। मंगलाचरण श्री बृहस्पति पाण्डेय द्वारा प्रस्तुत किया गया। 

 आईजीएनसीए क्षेत्रीय केन्द्र के निदेशक डॉ. अभिजित दीक्षित ने स्वागत उद्बोधन देते हुए कार्यक्रम की विषयवस्तु पर प्रकाश डाला तथा सभी अतिथियों एवं पुस्तक के लेखक का माल्यार्पण, अंगवस्त्र एवं स्मृति-चिह्न देकर सम्मान किया।

पुस्तक के लेखक चन्दन कुमार ने अपने वक्तव्य में पुस्तक की रचना-प्रक्रिया तथा पंडित दीनदयाल उपाध्याय के व्यक्तित्व और कृतित्व के विभिन्न आयामों पर विस्तार से चर्चा की। इसके उपरांत उपस्थित विद्वानों द्वारा पुस्तक ‘समर्पण’ का लोकार्पण किया गया।

मुख्य अतिथि श्री विद्याप्रसाद मिश्र ने कहा कि यह पुस्तक पंडित दीनदयाल उपाध्याय के जीवन की समग्रता को व्याख्यायित करती है। उन्होंने पुस्तक के प्रकाशन को लेखक और प्रकाशक के सतत परिश्रम का परिणाम बताते हुए पंडित जी के एकात्म मानववाद, राष्ट्रचिंतन और शिवत्व की साधना पर प्रकाश डाला। उन्होंने कहा कि आज की पीढ़ी के लिए पंडित दीनदयाल उपाध्याय के विचार प्रेरणास्रोत हैं।

पने अध्यक्षीय संबोधन में श्री रामाशीष सिंह ने कहा कि जब आदर्श व्यवहार में उतरता है तो वह दीनदयाल उपाध्याय जैसा व्यक्तित्व गढ़ता है। उन्होंने राष्ट्र के प्रति समर्पण, सेवा और प्रतिबद्धता को पंडित जी के जीवन का मूल संदेश बताते हुए कहा कि उनके विचार आज भी समाज को दिशा देने में सक्षम हैं।

कार्यक्रम के अंत में नागपुर से पधारे श्री स्वप्निल जी ने धन्यवाद ज्ञापन प्रस्तुत किया। कार्यक्रम का संचालन डॉ. रजनीकांत त्रिपाठी ने किया।

 इस अवसर पर तमिलनाडु से श्री वी. थिल्लई, डॉ. आनन्द धी राजा एवं श्री आर.आर. मुर्गेश, कर्नाटक से डॉ. पुनीत कुमार, बिहार से श्रीमती कुमकुम भारद्वाज, दिल्ली से श्री अजय शर्मा, लखनऊ से श्री गौतम उपाध्याय तथा आंध्र प्रदेश से श्री बाला कृष्ण सहित देश के विभिन्न राज्यों से आए विद्वान उपस्थित रहे। 


कार्यक्रम में काशी के वरिष्ठ समाजसेवी, कला प्रेमी, शिक्षाविद, काशी हिन्दू विश्वविद्यालय के शोधार्थी एवं बड़ी संख्या में विद्यार्थी उपस्थित रहे। कार्यक्रम विचार-विमर्श, संवाद और वैचारिक आदान-प्रदान का एक महत्वपूर्ण मंच सिद्ध हुआ। 







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