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काशी में श्रद्धा व वैदिक अनुष्ठानों के साथ मनाया गया पूज्यपाद स्वामी ज्ञानानंद सरस्वती जी महाराज का 76वां निर्वाण दिवस || AARCC LIVE NEWS VARANASI

 


वाराणसी|रिपोर्ट: आलोक चतुर्वेदी 

पूज्यपाद 1008 महर्षि स्वामी ज्ञानानंद सरस्वती जी महाराज—संस्थापक श्री भारत धर्म महामंडल, श्री आर्य महिला हितकारिणी महापरिषद, श्री विश्वेश्वर ट्रस्ट सोसाइटी, महामाया ट्रस्ट समिति एवं श्री वेणी माधवपुर ट्रस्ट—का 76वां निर्वाण दिवस ब्रह्मामयी गायत्री देवी के पावन प्रांगण में श्रद्धा, भक्ति और वैदिक परंपराओं के अनुरूप भव्य रूप से मनाया गया।

इस अवसर पर वैदिक ब्राह्मणों द्वारा स्वामी जी की मूर्ति का विधिवत षोडशोपचार पूजन एवं अर्चन किया गया। साथ ही विश्व कल्याण की भावना से 11 वैदिक ब्राह्मणों ने श्री हनुमान चालीसा के 5100 पाठ के पारायण का संकल्प लेकर विधिवत पाठ का शुभारंभ किया।

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कार्यक्रम को संबोधित करते हुए श्री वेणी माधवपुर ट्रस्ट के सेक्रेटरी सत्य नारायण पाण्डेय ने कहा कि सनातन आदि संस्कृति की त्रिवेणी—गंगा, गौ और कन्या शक्ति—की रक्षा हेतु तन, मन और धन से समर्पण आवश्यक है। उन्होंने कहा कि भारत राष्ट्र की धर्म सत्ता और राज सत्ता दोनों ही प्रमार्थ का ग्रास न बनें, यही पूज्यपाद स्वामी ज्ञानानंद जी महाराज का मूल चिंतन और संदेश रहा है।

उन्होंने बताया कि इसी पवित्र संकल्प के साथ सन 1901 में काशी की धरती से श्री भारत धर्म महामंडल की स्थापना कर स्वामी जी ने सनातन वैदिक एवं आर्य संस्कृति के दिव्य आलोक का प्रचार-प्रसार किया। आर्य संस्कृति के संरक्षण हेतु देश की कन्या शक्ति का सदाचार, शुद्ध सत्त्व एवं संस्कारवान होना अत्यंत आवश्यक है, इसी उद्देश्य से आर्य महिला हितकारिणी महापरिषद की स्थापना की गई।

कार्यक्रम में स्वामी जी द्वारा ज्योतिष्पीठ की परंपरा के पुनरुद्धार में दिए गए योगदान पर भी प्रकाश डाला गया। लगभग 165 वर्षों से उच्छिन्न ज्योतिष्पीठ की खोज कराकर, टिहरी के तत्कालीन जिलाधिकारी के सहयोग से भूमि प्राप्त कर निर्माण कराया गया तथा सन 1942 में तपस्वी स्वामी ब्रह्मानंद जी सरस्वती को ज्योतिष्पीठ के शंकराचार्य पद पर अभिषिक्त कराया गया।

कार्यक्रम में डॉ. प्यारे सिंह (सेक्रेटरी, महामाया ट्रस्ट), प्रो. शैलेन्द्र उपाध्याय, सत्येंद्र मिश्रा, शिव प्रसाद श्रीवास्तव, वीरेंद्र नाथ तिवारी (एड.), मुकेश पाठक, आलोक चंद्र भारद्वाज, नीरज पांडे, मोहन पाण्डेय, कमल कुमार, धनंजय दुबे, संतोष दुबे, पं. मुरारी उपाध्याय, राकेश पाण्डेय एवं आचार्य अनिल तिवारी सहित बड़ी संख्या में श्रद्धालु एवं गणमान्य नागरिक उपस्थित रहे।



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