‘निबंधन मित्र’ व्यवस्था के विरोध में यूपी भर में अनिश्चितकालीन हड़ताल, रजिस्ट्री कार्य प्रभावित | AARCC LIVE NEWS
रिपोर्ट/सचिन देव
यूपी में ‘निबंधन मित्र’ व्यवस्था के विरोध में अनिश्चितकालीन हड़ताल शुरू, रजिस्ट्री कार्य प्रभावित
मऊ, 12 जून 2026। उत्तर प्रदेश सरकार द्वारा निबंधन (रजिस्ट्री) कार्यालयों में पीपीपी (पब्लिक-प्राइवेट पार्टनरशिप) मॉडल के तहत प्रस्तावित ‘निबंधन मित्र’ व्यवस्था के विरोध में प्रदेशभर के अधिवक्ताओं, दस्तावेज लेखकों, स्टांप वेंडरों और मुंशियों ने शुक्रवार से अनिश्चितकालीन हड़ताल शुरू कर दी है। हड़ताल के कारण कई जिलों में रजिस्ट्री एवं निबंधन संबंधी कार्य प्रभावित होने लगे हैं, जिससे आम नागरिकों को भी असुविधा का सामना करना पड़ सकता है।
हड़ताल कर रहे संगठनों का आरोप है कि सरकार द्वारा प्रस्तावित निबंधन मित्र व्यवस्था निबंधन प्रणाली के निजीकरण की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम है। उनका कहना है कि यदि इस व्यवस्था को लागू किया गया तो वर्षों से निबंधन कार्यालयों से जुड़े दस्तावेज लेखक, टाइपिस्ट, मुंशी और स्टांप वेंडरों के रोजगार पर प्रतिकूल प्रभाव पड़ेगा।
रोजगार पर संकट की आशंका
प्रदर्शनकारियों का कहना है कि प्रदेश की प्रत्येक तहसील में बड़ी संख्या में लोग प्रत्यक्ष एवं अप्रत्यक्ष रूप से रजिस्ट्री और निबंधन कार्यों पर निर्भर हैं। प्रस्तावित व्यवस्था के तहत यदि फ्रंट ऑफिस संचालन निजी एजेंसियों अथवा निबंधन मित्रों को सौंपा जाता है, तो वर्तमान में कार्यरत हजारों लोगों की आजीविका प्रभावित हो सकती है।
संगठनों के पदाधिकारियों का कहना है कि सरकार को किसी भी नई व्यवस्था को लागू करने से पहले उससे प्रभावित होने वाले पक्षों से व्यापक विचार-विमर्श करना चाहिए, ताकि रोजगार और व्यवस्था दोनों के बीच संतुलन बनाया जा सके।
शासन तक पहुंचाई गई मांगें
हड़ताल के समर्थन में विभिन्न जिलों एवं तहसीलों में संबंधित अधिकारियों के माध्यम से शासन को ज्ञापन भेजे गए हैं। ज्ञापन में मांग की गई है कि सरकार निबंधन मित्र व्यवस्था को लागू करने के निर्णय पर पुनर्विचार करे तथा अधिवक्ताओं, दस्तावेज लेखकों, स्टांप वेंडरों एवं मुंशियों के हितों की रक्षा सुनिश्चित करे।
ज्ञापन में यह भी कहा गया है कि प्रस्तावित व्यवस्था लागू होने से बड़ी संख्या में परिवारों के समक्ष रोजगार का संकट खड़ा हो सकता है। संगठनों ने सरकार से संवाद स्थापित कर समाधान निकालने की अपील की है।
रजिस्ट्री कार्यों पर पड़ा असर
हड़ताल के चलते कई स्थानों पर रजिस्ट्री कार्यालयों में कार्य प्रभावित होने की सूचना मिली है। जमीन, मकान और अन्य संपत्तियों की खरीद-बिक्री से संबंधित दस्तावेजों के पंजीकरण की प्रक्रिया भी प्रभावित हो सकती है। इससे उन नागरिकों को परेशानी का सामना करना पड़ सकता है जिन्होंने पहले से रजिस्ट्री के लिए समय निर्धारित कर रखा है।
प्रमुख मांगें
- पीपीपी मॉडल के तहत प्रस्तावित ‘निबंधन मित्र’ व्यवस्था तत्काल वापस ली जाए।
- निबंधन व्यवस्था के निजीकरण पर रोक लगाई जाए।
- अधिवक्ताओं, दस्तावेज लेखकों, स्टांप वेंडरों एवं मुंशियों के रोजगार की सुरक्षा सुनिश्चित की जाए।
- नई व्यवस्था लागू करने से पहले संबंधित संगठनों से व्यापक संवाद किया जाए।
आंदोलन जारी रखने की चेतावनी
हड़ताल में शामिल संगठनों ने स्पष्ट किया है कि जब तक उनकी मांगों पर सकारात्मक निर्णय नहीं लिया जाता, तब तक आंदोलन जारी रहेगा। उन्होंने सरकार से शीघ्र हस्तक्षेप कर समाधान निकालने की मांग की है, ताकि निबंधन व्यवस्था सुचारु रूप से संचालित हो सके और इससे जुड़े लोगों के हित सुरक्षित रह सकें।





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